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| मुंगेली; 780 आवेदन, दर्जनों वादे… लेकिन क्या ‘सुशासन तिहार’ में गांवों की असली समस्याओं का होगा स्थायी इलाज? Aajtak24 News |
मुंगेली - जिले के लोरमी विकासखंड अंतर्गत ग्राम कारीडोंगरी में आयोजित “सुशासन तिहार-2026” का समाधान शिविर शुक्रवार को प्रशासनिक गतिविधियों और जनसुनवाई का बड़ा केंद्र बन गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप आयोजित इस शिविर में 26 ग्राम पंचायतों से पहुंचे ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं, मांगें और योजनाओं से जुड़ी परेशानियां प्रशासन के सामने रखीं। शिविर में 780 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनके निराकरण का दावा प्रशासन द्वारा किया गया।
शिविर में अलग-अलग विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। मंच से प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन, प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना, शौचालय निर्माण योजना, बिहान, लखपति दीदी योजना और आयुष्मान जैसी योजनाओं का खूब प्रचार हुआ। जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वर्षा विक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है और “सरकार आपके द्वार” की सोच अब गांवों तक उतर चुकी है।
कार्यक्रम में वनमंडलाधिकारी श्री अभिनव कुमार ने पर्यावरण संरक्षण, जल संकट और सौर ऊर्जा पर ग्रामीणों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जल संकट और गंभीर हो सकता है, इसलिए अभी से जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाना जरूरी है। उन्होंने ग्रामीणों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की अपील की।
शिविर के दौरान विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को लाभ भी वितरित किए गए। 13 लोगों को पीएम जनमन आवास की चाबी, 29 हितग्राहियों को शौचालय स्वीकृति आदेश, 30 श्रमिकों को श्रमिक पंजीयन कार्ड, 10 किसानों को फलदार पौधे, 11 किसानों को केसीसी चेक और कई लोगों को आयुष्मान कार्ड तथा राशन कार्ड दिए गए। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से सुपोषण टोकरी और नानी सुरक्षा बॉन्ड भी वितरित किए गए।
हालांकि शिविर में बड़ी संख्या में आवेदन आने से यह भी साफ हो गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत समस्याएं अब भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं। सड़क, आवास, रोजगार, पेयजल और सामाजिक योजनाओं के लाभ को लेकर ग्रामीणों को अब भी सरकारी शिविरों का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रशासन ने आवेदन निराकरण का दावा जरूर किया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन समस्याओं का स्थायी समाधान होगा या फिर अगले शिविर तक फाइलें ही घूमती रहेंगी।
ग्रामीणों ने शिविर में मौजूद अधिकारियों से सीधे संवाद किया और कई लोगों ने पहली बार महसूस किया कि प्रशासन गांव तक पहुंचा है। लेकिन दूसरी तरफ कई ग्रामीणों के मन में यह चिंता भी दिखी कि योजनाओं का लाभ केवल प्रमाण पत्र और मंचीय वितरण तक सीमित न रह जाए।
सुशासन तिहार के जरिए सरकार गांव-गांव तक अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में जुटी है, लेकिन अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन शिविरों से निकले आवेदनों का जमीनी समाधान कितनी तेजी और पारदर्शिता से होता है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जब एक ही शिविर में 780 से अधिक आवेदन आए, तो क्या यह नहीं दर्शाता कि गांवों में नियमित प्रशासनिक व्यवस्था और विभागीय मॉनिटरिंग पूरी तरह कमजोर हो चुकी है?
- शिविर में योजनाओं के प्रमाण पत्र और चाबियां बांट दी गईं, लेकिन कितने हितग्राहियों को वास्तव में समय पर पैसा, निर्माण सामग्री और स्थायी सुविधाएं मिलीं — क्या इसका कोई सार्वजनिक ऑडिट होगा?
- सरकार “सुशासन आपके द्वार” का दावा कर रही है, तो फिर लोगों को अपनी मूलभूत समस्याएं बताने के लिए विशेष शिविरों का इंतजार क्यों करना पड़ रहा है? क्या स्थानीय स्तर पर सिस्टम फेल हो चुका है?
