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| विदिशा; 650 जांचें, 180 खतरे में: क्या विदिशा की मातृत्व व्यवस्था सिर्फ आंकड़ों की सफलता है या जमीनी हकीकत कुछ और? Aajtak24 News |
विदिशा - जिले में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत आयोजित स्वास्थ्य शिविरों में शनिवार को बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने इसे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। अभियान के दौरान जिले के विभिन्न शासकीय अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में लगभग 650 गर्भवती महिलाओं की विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा जांच की गई, जबकि 180 महिलाओं को हाई रिस्क श्रेणी में चिन्हित किया गया।
कलेक्टर श्री अंशुल के निर्देशन में आयोजित इस विशेष अभियान का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना बताया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जांच के दौरान महिलाओं की विस्तृत स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की गई और जरूरत के अनुसार उपचार व परामर्श भी दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि हाई रिस्क गर्भवतियों को विशेष निगरानी में रखते हुए एफसीएम और आयरन सुक्रोस जैसी जरूरी दवाएं दी गईं ताकि एनीमिया और गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं को नियंत्रित किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि लगातार निगरानी और समय पर उपचार से जच्चा-बच्चा दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
सीएमएचओ डॉ. रामहित कुमार ने बताया कि अभियान के दौरान गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व, संतुलित आहार, नियमित जांच और संस्थागत प्रसव के महत्व की जानकारी भी दी गई। महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों को लेकर जागरूक किया गया ताकि प्रसव के समय किसी भी प्रकार का खतरा कम किया जा सके।
हालांकि, अभियान के आंकड़े एक तरफ राहत देने वाले दिखाई देते हैं, लेकिन दूसरी ओर यह सवाल भी खड़े कर रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी में क्यों पहुंच रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण की कमी, समय पर जांच न होना और स्वास्थ्य सुविधाओं तक सीमित पहुंच इसके बड़े कारण हो सकते हैं।
जिला प्रशासन का दावा है कि हर गर्भवती महिला तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने और हाई रिस्क मामलों की लगातार मॉनिटरिंग करने के लिए स्वास्थ्य विभाग सक्रिय रूप से काम कर रहा है। आने वाले समय में ऐसे शिविरों की संख्या बढ़ाने और दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत करने की भी बात कही जा रही है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जब 650 में से 180 गर्भवतियां हाई रिस्क निकलीं, तो क्या यह नहीं दर्शाता कि जिले में गर्भवती महिलाओं तक नियमित पोषण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं समय पर नहीं पहुंच रहीं?
- स्वास्थ्य विभाग हर महीने अभियान चलाने का दावा करता है, फिर भी इतनी बड़ी संख्या में एनीमिया और जटिल गर्भावस्था के मामले सामने आना क्या विभागीय निगरानी की विफलता नहीं है?
- जिन हाई रिस्क गर्भवतियों की पहचान की गई है, क्या उनके गांव स्तर पर फॉलोअप और इमरजेंसी ट्रांसपोर्ट की कोई ठोस व्यवस्था है, या यह अभियान सिर्फ एक दिन की औपचारिकता बनकर रह जाएगा?
