पेंड्रा की पुरानी बस्ती में मिला इतिहास का अनमोल खजाना, 500 साल पुरानी हस्तलिखित गीता सहित दुर्लभ पांडुलिपियां सुरक्षित Aajtak24 News

पेंड्रा की पुरानी बस्ती में मिला इतिहास का अनमोल खजाना, 500 साल पुरानी हस्तलिखित गीता सहित दुर्लभ पांडुलिपियां सुरक्षित Aajtak24 News

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही - भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित “ज्ञानभारतम” राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत जीपीएम जिले में इतिहास और संस्कृति से जुड़ी अमूल्य धरोहरें सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में पेंड्रा की पुरानी बस्ती में लगभग 200 से 500 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां मिलने से प्रशासनिक अमला और सर्वेक्षण टीम उत्साहित नजर आई। इन प्राचीन धरोहरों का कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन की मौजूदगी में डिजिटल संरक्षण कर सुरक्षित किया गया। जानकारी के अनुसार, वार्ड क्रमांक-4 स्थित पंडित मोहन दत्त शर्मा के घर सर्वेक्षण टीम को लगभग 500 वर्ष पुरानी हस्तलिखित “अथ श्रीमद्भागवत गीता” सहित कई महत्वपूर्ण धार्मिक पांडुलिपियां प्राप्त हुईं। इन पांडुलिपियों को देखकर कलेक्टर डॉ. देवांगन ने प्रसन्नता व्यक्त की और धार्मिक ग्रंथ पर श्रीफल एवं दक्षिणा अर्पित कर मत्था टेका। उन्होंने इसे जिले की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का दुर्लभ खजाना बताया।

कलेक्टर ने कहा कि इस तरह की पांडुलिपियां केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, भाषा, संस्कृति और ज्ञान परंपरा की जीवित पहचान हैं। इन्हें सुरक्षित रखना वर्तमान पीढ़ी की बड़ी जिम्मेदारी है। प्रशासन द्वारा इन पांडुलिपियों की जियो टैगिंग कर “ज्ञानभारतम” एप के माध्यम से डिजिटल संरक्षण सुनिश्चित किया गया है, जबकि मूल पांडुलिपियां पूर्ववत परिवार के संरक्षण में रहेंगी। सर्वेक्षण के दौरान मिली अन्य महत्वपूर्ण पांडुलिपियों में “लग्न चंद्रिका”, “अथश्रीभागवत महात्म्य”, “यद्वादशमहावाक्य”, “सारस्वत तद्वित प्रक्रिया” सहित कई प्राचीन धार्मिक एवं संस्कृत ग्रंथ शामिल हैं। इन ग्रंथों की लिपि, भाषा और संरचना को देखकर विशेषज्ञ इन्हें अत्यंत दुर्लभ मान रहे हैं।

धार्मिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर प्रशासन ने पंडित मोहन दत्त शर्मा के संयुक्त परिवार के साथ पांडुलिपियों की विशेष फोटोग्राफी भी कराई। इस दौरान परिवार के सदस्य—श्रीमती शशीदेवी शर्मा, गिरीश दत्त शर्मा, संदीप दत्त शर्मा, रंजीता शर्मा, अमृता शर्मा, वरुण दत्त शर्मा, वेदांत दत्त शर्मा, सारस्वत दत्त शर्मा और सौम्या शर्मा मौजूद रहे। इसी अभियान के दौरान जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह के घर भी लगभग 200 वर्ष पुरानी हस्तलिखित जमींदारी वंशावली और पेंड्रागढ़ के राजस्व एवं वन विभाग से जुड़े ऐतिहासिक नक्शे प्राप्त हुए। इन दस्तावेजों का भी डिजिटल संरक्षण किया गया। कलेक्टर ने राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह और उनकी पत्नी श्रीमती शिखा सिंह से ऐतिहासिक विरासत और पारिवारिक इतिहास पर विस्तृत चर्चा की।

“ज्ञानभारतम” अभियान के जिला समन्वयक डॉ. राहुल गौतम के नेतृत्व में चल रहे इस सर्वेक्षण का उद्देश्य देशभर में बिखरी प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान, दस्तावेजीकरण और संरक्षण करना है ताकि आने वाली पीढ़ियां भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ सकें। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्री मुकेश रावटे, एसडीएम विक्रांत अंचल, डिप्टी कलेक्टर अमित बेक, सीएमओ अमनदीप मिंज सहित प्रशासनिक अधिकारी और सर्वेक्षण दल के सदस्य मौजूद रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब इतने महत्वपूर्ण और दुर्लभ ग्रंथ निजी घरों में वर्षों से सुरक्षित थे, तो क्या शासन-प्रशासन को अब तक इनके अस्तित्व की जानकारी नहीं थी, और यदि नहीं थी तो सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की सरकारी व्यवस्था कितनी प्रभावी मानी जाए?
  2. डिजिटल संरक्षण की प्रक्रिया तो पूरी हो गई, लेकिन क्या इन 200 से 500 साल पुरानी पांडुलिपियों के भौतिक संरक्षण, वैज्ञानिक परीक्षण और विशेषज्ञ अध्ययन के लिए भी कोई स्थायी योजना बनाई गई है?
  3. इतिहास और संस्कृति से जुड़ी इतनी महत्वपूर्ण पांडुलिपियां मिलने के बाद क्या प्रशासन पेंड्रा क्षेत्र को ‘हेरिटेज जोन’ या विशेष सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कोई पहल करेगा?

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