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| छतरपुर; 5 साल से अटका हक… कलेक्टर ने एक महीने में दिलाई राहत, खिल उठे कर्मचारियों के चेहरे Aajtak24 News |
छतरपुर - जिले में वर्षों से लंबित पड़े समयमान-वेतनमान के मामलों में आखिरकार कर्मचारियों को बड़ी राहत मिल गई। कलेक्टर पार्थ जैसवाल की पहल पर आयोजित कर्मचारी कल्याण शिविर में 84 तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को समयमान-वेतनमान का लाभ दिया गया, जिससे कर्मचारियों के चेहरों पर लंबे इंतजार के बाद मुस्कान लौट आई। जानकारी के अनुसार भृत्य, लिपिक और वाहन चालक जैसे कर्मचारियों के प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ समयमान-वेतनमान से जुड़े मामले पिछले करीब पांच वर्षों से लंबित थे। कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने लगभग एक माह पूर्व कलेक्टर से मुलाकात कर इस समस्या के समाधान की मांग की थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने संवेदनशीलता दिखाते हुए अपर कलेक्टर नमः शिवाय अरजरिया की अध्यक्षता में एक समिति गठित की। समिति में डीओ ट्राइबल, जिला पेंशन अधिकारी और ई-गवर्नेंस प्रबंधक को भी शामिल किया गया। समिति ने अन्य जिलों में पदस्थ तत्कालीन कलेक्टरों और अपर कलेक्टरों से संपर्क कर कर्मचारियों के गोपनीय प्रतिवेदन (सीआर) मंगवाए और दस्तावेजों का परीक्षण किया। महज 20 से 25 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूरी कर आदेश जारी कर दिए गए।
समिति के पास कुल 101 आवेदन पहुंचे थे, जिनमें से परीक्षण के बाद 84 कर्मचारियों को समयमान-वेतनमान का लाभ स्वीकृत किया गया। इससे कर्मचारियों को हर महीने लगभग 2 से 4 हजार रुपये तक का अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलेगा। कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित कर्मचारी कल्याण शिविर के दौरान कलेक्टर ने कहा कि समयमान-वेतनमान कर्मचारियों का अधिकार है और पात्र कर्मचारियों को इसका लाभ समय पर मिलना चाहिए। इस मौके पर जिला पंचायत सीईओ सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।
लाभ मिलने के बाद कर्मचारियों ने कलेक्टर और समिति के प्रति आभार व्यक्त किया। लंबे समय से लंबित प्रकरणों के समाधान को लेकर कर्मचारियों में उत्साह देखने को मिला।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जब समयमान-वेतनमान कर्मचारियों का अधिकार था, तो फिर ये मामले पांच वर्षों तक लंबित क्यों रहे? क्या पूर्व अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?
- 101 आवेदनों में से केवल 84 कर्मचारियों को ही लाभ मिला— बाकी 17 मामलों को क्यों रोका गया और क्या उन्हें भी जल्द राहत मिलेगी?
- अगर एक समिति 20-25 दिनों में वर्षों पुराने मामलों का समाधान कर सकती है, तो प्रशासनिक व्यवस्था पहले इतने वर्षों तक निष्क्रिय क्यों रही?
