गरियाबंद; समाधान शिविर या वादों का मेला? 400 आवेदन लेकर पहुंचे ग्रामीण, मौके पर कितनी बदली तस्वीर Aajtak24 News

गरियाबंद; समाधान शिविर या वादों का मेला? 400 आवेदन लेकर पहुंचे ग्रामीण, मौके पर कितनी बदली तस्वीर Aajtak24 News

गरियाबंद - छत्तीसगढ़ सरकार के “सुशासन तिहार 2026” अभियान के तहत गरियाबंद जिले के देवभोग विकासखंड के ग्राम माडागांव में आयोजित जिला स्तरीय समाधान शिविर में शुक्रवार को प्रशासन और जनता आमने-सामने नजर आए। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। शिविर में आवास, राशन कार्ड, श्रम कार्ड नवीनीकरण, आधार कार्ड सुधार, सड़क, पुलिया, नाली निर्माण, नल कनेक्शन और राजस्व प्रकरणों सहित 400 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। प्रशासन की ओर से दावा किया गया कि कई प्रकरणों का मौके पर ही निराकरण कर दिया गया, जबकि बाकी मामलों के लिए संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

कार्यक्रम का भावनात्मक पहलू उस समय सामने आया जब नक्सल ऑपरेशन में शहीद हुए जवान भीष्म कुमार यदु को श्रद्धांजलि दी गई। जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप, जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर और अन्य जनप्रतिनिधियों ने शहीद के पिता नंदोलाल यदु का शॉल और श्रीफल भेंटकर सम्मान किया। साथ ही शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके बलिदान को नमन किया गया। शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ भी वितरित किया गया। मछली पालन विभाग ने स्व-सहायता समूहों और मछुआ समितियों को जाल और आइस बॉक्स दिए। समाज कल्याण विभाग की ओर से दिव्यांग हितग्राहियों को ट्राइसाइकिल और व्हीलचेयर वितरित की गई।

शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों को भी मंच से सम्मानित किया गया। सेजेस स्कूल झाखरपारा की छात्रा कमला मरकाम को 10वीं में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर सम्मान मिला, जबकि देव आशीष पात्रा के नवोदय विद्यालय चयन को भी सराहा गया। शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय माडागांव के प्राचार्य मन्नूराम सांडिल्य को बोर्ड परीक्षा में शत-प्रतिशत परिणाम के लिए सम्मानित किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग ने दो गर्भवती महिलाओं की गोदभराई कर उन्हें पोषण सामग्री और उपहार प्रदान किए, वहीं एक बच्चे का अन्नप्राशन संस्कार भी कराया गया। हालांकि शिविर में योजनाओं का वितरण और सम्मान समारोह ने सकारात्मक तस्वीर पेश की, लेकिन ग्रामीणों द्वारा बड़ी संख्या में सड़क, पानी, आवास और राजस्व से जुड़े आवेदन दिए जाना यह भी दर्शाता है कि बुनियादी समस्याएं अब भी जमीनी स्तर पर कायम हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या समाधान शिविर स्थायी समाधान बन पाएंगे या केवल सरकारी आयोजन बनकर रह जाएंगे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब सुशासन तिहार का उद्देश्य समस्याओं का त्वरित समाधान है, तो फिर एक ही शिविर में 400 से अधिक लंबित आवेदन सामने आने की नौबत क्यों आई?
  2. जिन ग्रामीणों ने सड़क, पुलिया और नल कनेक्शन जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग की, उनके लिए क्या कोई तय समयसीमा और बजट सार्वजनिक किया जाएगा?
  3. शहीदों के सम्मान की बात मंच से हुई, लेकिन नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए अब तक कौन-सी ठोस कार्रवाई जमीन पर दिखाई देती है?

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