बलरामपुर; सम्मेलन में श्रमिकों को सम्मान, योजनाओं के चेक और भोजन परोसा गया Aajtak24 News

बलरामपुर; सम्मेलन में श्रमिकों को सम्मान, योजनाओं के चेक और भोजन परोसा गया Aajtak24 News

बलरामपुर - जिले में शुक्रवार को आयोजित जिला स्तरीय श्रमिक सम्मेलन केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि श्रमिकों के सम्मान और उनके अधिकारों को लेकर प्रशासनिक व राजनीतिक संदेश देने का प्रयास बनकर सामने आया। ऑडिटोरियम परिसर में आयोजित इस सम्मेलन में सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों ने मंच से श्रमिकों के हितों की बातें कीं, योजनाओं की जानकारी दी और कई हितग्राहियों को सहायता राशि के चेक भी वितरित किए। सम्मेलन का सबसे चर्चित दृश्य वह रहा, जब सांसद और अन्य जनप्रतिनिधि स्वयं श्रमिकों के बीच पहुंचे और अपने हाथों से उन्हें भोजन परोसते दिखाई दिए। इस दौरान श्रमिकों से आत्मीय संवाद भी किया गया। कार्यक्रम में मौजूद श्रमिकों ने इस व्यवहार को सम्मान और अपनत्व से जोड़कर देखा।

अपने संबोधन में सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि श्रमिकों के बिना विकास की कल्पना संभव नहीं है। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार श्रमिकों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और योजनाओं के माध्यम से श्रमिक परिवारों को आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने श्रमिकों से श्रम विभाग में पंजीयन कराने और योजनाओं का लाभ लेने की अपील भी की। कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष सुमित्रा चेरवा ने कहा कि मजदूरों की मेहनत से ही विकास कार्यों को गति मिलती है। वहीं पूर्व जनपद उपाध्यक्ष भानु प्रकाश दीक्षित ने श्रमिक परिवारों से अपने बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की अपील करते हुए कहा कि शिक्षा ही बेहतर भविष्य का आधार है।

जिला पंचायत सीईओ नयनतारा सिंह तोमर ने श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि महतारी जतन योजना, नौनिहाल सुरक्षा योजना, छात्रवृत्ति सहायता योजना, श्रमिक सियान सहायता योजना और प्रसूति सहायता योजना जैसी कई योजनाएं श्रमिक परिवारों के लिए संचालित की जा रही हैं। सम्मेलन के दौरान विभिन्न योजनाओं के तहत 10 हितग्राहियों को सहायता राशि के चेक वितरित किए गए। साथ ही विभागीय स्टॉल लगाकर स्वास्थ्य परीक्षण, निःशुल्क दवा वितरण, श्रम पंजीयन और कर्मचारी राज्य बीमा सेवाओं की जानकारी भी दी गई।

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार जिले में वर्ष 2025-26 के दौरान सैकड़ों श्रमिकों और उनके परिवारों को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया गया है। इनमें छात्रवृत्ति, प्रसूति सहायता, मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता और बेटियों के लिए सशक्तिकरण योजनाएं शामिल हैं। हालांकि सम्मेलन में सम्मान और संवेदनशीलता की तस्वीर जरूर दिखाई दी, लेकिन सवाल यह भी है कि क्या श्रमिकों को केवल योजनाओं और सम्मेलनों से स्थायी आर्थिक सुरक्षा मिल पाएगी? जिले के असंगठित श्रमिकों को नियमित रोजगार, न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल पर सुरक्षा जैसे मुद्दे अब भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में यह सम्मेलन उम्मीद और सवाल—दोनों छोड़ गया।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जिले में हजारों श्रमिक पंजीकृत हैं, लेकिन कितने श्रमिकों को नियमित रोजगार और न्यूनतम मजदूरी की गारंटी वास्तव में मिल रही है?
  2. सम्मेलन में 10 हितग्राहियों को मंच से चेक दिए गए, लेकिन जिले के बाकी जरूरतमंद श्रमिकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की वास्तविक समयसीमा क्या है?
  3. श्रमिकों को सम्मान देने की बात हो रही है, तो फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा उपकरणों की कमी और दुर्घटनाओं पर जवाबदेही तय करने के लिए अब तक कौन-सी ठोस व्यवस्था बनाई गई है?

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