| बालोद; मंगलतराई में ‘सुशासन का महाशिविर’: 12 गांवों के लोगों को मिली एक ही छत के नीचे राहत Aajtak24 News |
बालोद - सुशासन तिहार 2026 के तहत डौण्डी विकासखंड के सुदूर वनांचल ग्राम मंगलतराई में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर ग्रामीणों और हितग्राहियों के लिए राहत और सुविधाओं की बड़ी सौगात लेकर आया। इस शिविर में मंगलतराई सहित आसपास की 12 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण शामिल हुए, जहां शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ सीधे मौके पर ही प्रदान किया गया। हाई स्कूल मैदान में आयोजित इस शिविर में बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से कुल 205 आवेदनों में से 105 का मौके पर ही निराकरण किया गया। शेष मामलों को प्रक्रिया में लेकर शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया गया।
शिविर में स्वामित्व योजना के तहत 15 हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख प्रदान किए गए, जबकि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के 11 हितग्राहियों को आवास पूर्णता प्रमाण पत्र दिया गया। इसके अलावा 10 लोगों को मनरेगा जॉब कार्ड, 8 हितग्राहियों को श्रवण यंत्र, 8 को बैटरी स्प्रेयर, 4 को नया राशन कार्ड और 5 को वृद्धा पेंशन स्वीकृति आदेश प्रदान किए गए। मत्स्य पालन प्रसार योजना के अंतर्गत 2 हितग्राहियों को जाल और आइस बॉक्स भी वितरित किए गए। साथ ही दिव्यांगजनों के लिए मेडिकल बोर्ड लगाकर मौके पर ही दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए गए, जिससे कई लोगों को राहत मिली।
शिविर का सबसे भावनात्मक क्षण तब रहा जब छोटे बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार कराया गया और गर्भवती माताओं को सुपोषण किट देकर गोदभराई की रस्म पूरी की गई। इसके साथ ही बाल विवाह रोकथाम के लिए शपथ भी दिलाई गई। कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष मुकेश कौड़ो ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य शासन को सीधे जनता के बीच लाना और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। उन्होंने बाल विवाह को सामाजिक अपराध बताते हुए लोगों से इसके खिलाफ जागरूक रहने की अपील की। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के शिविरों से ग्रामीणों को एक ही स्थान पर कई योजनाओं का लाभ मिल रहा है, जिससे समय और संसाधनों की बचत हो रही है। वहीं ग्रामीणों ने शिविर की सराहना करते हुए इसे “सीधा समाधान देने वाली व्यवस्था” बताया।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- 205 में से केवल 105 आवेदनों का ही मौके पर समाधान हुआ, बाकी 100 मामलों को लंबित क्यों रखा गया—क्या इनके लिए स्पष्ट समयसीमा तय की गई है?
- क्या ऐसे शिविरों में दिए जा रहे लाभ स्थायी समाधान हैं या केवल अस्थायी राहत, जिनकी फॉलोअप मॉनिटरिंग की कोई व्यवस्था नहीं है?
- 12 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों को एक जगह लाने के बावजूद क्या सभी पात्र हितग्राहियों की 100% पहचान और लाभ सुनिश्चित हो पा रहा है, या अभी भी कई लोग योजनाओं से वंचित रह जाते हैं?