राजनांदगांव; पहियों ने दी आज़ादी: मनीष की जिंदगी में आई रफ्तार, सुशासन तिहार बना उम्मीद की चाबी Aajtak24 News

राजनांदगांव; पहियों ने दी आज़ादी: मनीष की जिंदगी में आई रफ्तार, सुशासन तिहार बना उम्मीद की चाबी Aajtak24 News

राजनांदगांव - सुशासन तिहार के तहत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर ने एक दिव्यांग युवक के जीवन में बड़ा बदलाव ला दिया। ग्राम सिंघोला निवासी मनीष साहू, जो दोनों पैरों से दिव्यांग हैं, अब अपने दैनिक कार्यों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहेंगे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने उन्हें मोटराईज्ड ट्रायसायकल प्रदान कर आत्मनिर्भरता की दिशा में एक नई राह दी। ग्राम पंचायत मुड़पार में आयोजित शिविर के दौरान मनीष को यह सहायक उपकरण सौंपा गया। इस मौके पर मनीष और उनकी मां अनीता साहू की आंखों में राहत और खुशी साफ झलक रही थी। वर्षों से घर से बाहर निकलना उनके लिए एक बड़ी चुनौती था, लेकिन अब ट्रायसायकल मिलने के बाद यह कठिनाई काफी हद तक खत्म हो गई है।

मनीष साहू की मां ने बताया कि पहले उन्हें अपने बेटे को गोद में उठाकर या सहारा देकर बाहर ले जाना पड़ता था, जिससे उन्हें काफी परेशानी होती थी। कई बार इलाज या जरूरी काम के लिए भी उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन अब यह सहायक उपकरण उनके जीवन में बड़ी राहत लेकर आया है। सुशासन तिहार शिविर में किए गए आवेदन पर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मौके पर ही मोटराईज्ड ट्रायसायकल उपलब्ध कराई। इसे केवल एक सहायता नहीं बल्कि मनीष के लिए आत्मनिर्भर जीवन की शुरुआत माना जा रहा है।

मनीष ने खुशी जताते हुए कहा कि अब वे खुद डॉक्टर के पास जा सकेंगे, बाजार जा सकेंगे और अपने छोटे-मोटे काम भी बिना किसी सहारे के कर सकेंगे। उन्होंने शासन और प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहायता उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। प्रशासन का कहना है कि ऐसे शिविरों का उद्देश्य सिर्फ आवेदन लेना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों को मौके पर ही राहत देना है। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि सही समय पर मिली सहायता किसी भी व्यक्ति के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. क्या दिव्यांग सहायता जैसी योजनाओं के लिए पहले से सूचीबद्ध पात्र लाभार्थियों को शामिल किया जाता है, या केवल शिविर में आवेदन करने वालों को ही तत्काल लाभ मिलता है?
  2. प्रदेश में ऐसे कितने दिव्यांग लोग हैं जिन्हें अब तक सहायक उपकरण नहीं मिले हैं, और उनके लिए समयबद्ध वितरण की क्या व्यवस्था है?
  3. सुशासन तिहार जैसे शिविरों में त्वरित सहायता दी जा रही है, लेकिन क्या यह मॉडल स्थायी व्यवस्था का हिस्सा बनेगा या केवल कार्यक्रमों तक सीमित रहेगा?

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