कोरबा; खेती को मिली नई ताकत: गिधौरी के किसान की सूखी उम्मीद में ‘पंप’ ने भरी रफ्तार Aajtak24 News

कोरबा; खेती को मिली नई ताकत: गिधौरी के किसान की सूखी उम्मीद में ‘पंप’ ने भरी रफ्तार Aajtak24 News

कोरबा - सुशासन तिहार 2026 के तहत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर ने ग्राम गिधौरी के किसान दीनदयाल यादव के जीवन में बड़ी राहत पहुंचाई है। लंबे समय से सिंचाई सुविधा की कमी से जूझ रहे इस किसान को अब 1.5 एचपी का विद्युत पंप प्रदान किया गया है, जिससे उनकी खेती को नई गति मिलने की उम्मीद है। 52 वर्षीय दीनदयाल यादव खेती के साथ-साथ सिलाई कार्य कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनके पास लगभग ढाई एकड़ कृषि भूमि है, लेकिन सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण खेती प्रभावित होती रही। पानी की कमी उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई थी।

सुशासन तिहार के दौरान उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए कृषि विभाग ने उन्हें लगभग 15,875 रुपये मूल्य का विद्युत पंप उपलब्ध कराया। इस सहायता के बाद अब वे अपने खेतों की सिंचाई समय पर कर सकेंगे, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि की संभावना है। पंप मिलने के बाद किसान दीनदयाल यादव के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। उन्होंने इसे अपने जीवन में बड़ा बदलाव बताते हुए राज्य सरकार और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चली आ रही सिंचाई की समस्या अब खत्म हो गई है, जिससे खेती आसान और लाभकारी हो जाएगी।

सरकारी स्तर पर कहा गया कि सुशासन तिहार का उद्देश्य केवल आवेदन लेना नहीं, बल्कि किसानों और आम नागरिकों की समस्याओं का मौके पर समाधान करना है। इसी पहल के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि, सिंचाई और आजीविका से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता से हल किया जा रहा है। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि यदि योजनाएं जमीन पर सही तरीके से लागू हों, तो छोटे किसानों की जिंदगी में भी बड़ा बदलाव संभव है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. क्या केवल उपकरण (जैसे पंप) देने से ही सिंचाई संकट खत्म हो जाएगा, या पानी उपलब्धता और बिजली आपूर्ति जैसी मूल समस्याओं पर भी ठोस काम हो रहा है?
  2. क्या ऐसे सभी पात्र किसानों तक यह सहायता पहुंच पा रही है, या केवल शिविर में आए आवेदकों तक ही लाभ सीमित रह जाता है?
  3. कृषि उत्पादन बढ़ाने के दावे के बीच क्या सरकार के पास यह आंकड़ा है कि पिछले वर्षों में सिंचाई उपकरण देने के बाद वास्तव में किसानों की आय में कितना इजाफा हुआ है?

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