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| रीवा में सिस्टम की 'क्रैश' रिपोर्ट: प्रदूषण विभाग ने कागजों पर बंद की क्रेशर, हकीकत में धड़ल्ले से उगल रही धूल Aajtak24 News |
रीवा -मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जनता की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए बनाए गए CM हेल्पलाइन पोर्टल को रीवा के प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों ने महज एक औपचारिक मजाक बना दिया है। जिले के ग्राम क्षेत्र में संचालित सचिन कुशवाहा की क्रेशर मशीनरी को लेकर एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने प्रशासनिक पारदर्शिता की पोल खोलकर रख दी है। अधिकारियों द्वारा पोर्टल पर इस क्रेशर को महीनों से बंद बताया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
कागजों पर ताला, जमीन पर धुआं स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि प्रदूषण विभाग के अधिकारी लगातार भ्रामक जानकारी पोर्टल पर अपलोड कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, क्रेशर न केवल संचालित है, बल्कि रात के सन्नाटे में भी मशीनों की आवाज दूर-तक सुनाई देती है। सबसे बड़ा सवाल बिजली बिल को लेकर खड़ा हो रहा है; ग्रामीणों का तर्क है कि यदि क्रेशर वास्तव में महीनों से बंद है, तो संचालक सचिन कुशवाहा द्वारा हर महीने लाखों रुपए का बिजली बिल किस आधार पर और क्यों जमा किया जा रहा है? बिना भारी मशीनों के चले इतना अधिक बिजली उपभोग संभव ही नहीं है।
बिना NOC और भंडारण अनुमति के संचालन शिकायत के अनुसार, यह क्रेशर खसरा नंबर 151 और 152 पर संचालित की जा रही है, जबकि इस भूमि पर संचालन के लिए कोई NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) ही मौजूद नहीं है। इतना ही नहीं, क्रेशर संचालक के पास वैध खनिज भंडारण की अनुमति भी नहीं है। क्रेशर का संचालन एक सार्वजनिक तालाब के समीप किया जा रहा है, जिससे न केवल जल स्रोत दूषित हो रहा है, बल्कि आसपास के पर्यावरण को भी अपूरणीय क्षति पहुँच रही है।
न्यायालय में मामला लंबित, फिर भी बेखौफ संचालक हैरानी की बात यह है कि उक्त क्रेशर के विरुद्ध प्रदूषण संबंधी मामला पहले से ही न्यायालय में लंबित है। इसके बावजूद, प्रशासनिक स्तर पर किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न होना विभाग की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करता है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी एसी कमरों में बैठकर शिकायतों को बंद कर रहे हैं, जबकि मौके पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग क्षेत्र के त्रस्त ग्रामीणों ने अब जिला कलेक्टर से इस पूरे सिंडिकेट की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
बिना भंडारण अनुमति के चल रही क्रेशर को तत्काल सीज (Seize) किया जाए।
क्रेशर का विद्युत कनेक्शन तुरंत काटा जाए ताकि चोरी-छिपे होने वाला रात का संचालन बंद हो सके।
CM हेल्पलाइन पर गलत जानकारी देने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
रीवा का यह मामला स्पष्ट करता है कि कैसे रसूखदार संचालक और भ्रष्ट अधिकारी मिलकर शासन की योजनाओं को विफल कर रहे हैं। यदि समय रहते तालाब और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यहाँ के निवासियों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अब जनता की निगाहें जिले के आला अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस 'कागजी खेल' को कब खत्म करते हैं।
