नवागत कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी का 'मिशन जतरी': सादगी और कड़े तेवरों के साथ नई पारी का आगाज Aajtak24 News

नवागत कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी का 'मिशन जतरी': सादगी और कड़े तेवरों के साथ नई पारी का आगाज Aajtak24 News

रीवा - रीवा जिले के नए कलेक्टर  नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने पदभार ग्रहण करते ही अपने काम करने के अंदाज से जनता और प्रशासनिक गलियारों में एक स्पष्ट संदेश दे दिया है। पद संभालने के पहले ही दिन कलेक्टर ने किसी लग्जरी गाड़ी के बजाय अधिकारियों के साथ बस में सवार होकर दूरस्थ ग्रामीण अंचल डभौरा के जतरी ग्राम पंचायत का रुख किया। उनके इस सादगी भरे अंदाज ने जहाँ ग्रामीणों का दिल जीत लिया, वहीं काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को सतर्क भी कर दिया है।

जनता से सीधा संवाद और योजनाओं की पड़ताल

जतरी गाँव पहुँचकर कलेक्टर ने ग्रामीणों से चौपाल लगाकर सीधा संवाद किया। उन्होंने शासन की योजनाओं की जमीनी हकीकत जानी और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना सुनिश्चित करें। उन्होंने जनता से भी अपील की कि वे अपने अधिकारों और योजनाओं के प्रति जागरूक होकर आगे आएं। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ  मेहताब सिंह गुर्जर सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

चुनौतियों का पहाड़ और जनता की उम्मीदें

कलेक्टर सूर्यवंशी के सामने रीवा में चुनौतियों की एक लंबी फेहरिस्त है। जहाँ एक ओर उन्हें राजनेताओं के साथ सामंजस्य बिठाना है, वहीं दूसरी ओर राजस्व न्यायालयों, तहसील और अनुविभागीय अधिकारी कार्यालयों में लंबित पड़ी फाइलों का अंबार और उनमें पारदर्शिता लाना एक बड़ी परीक्षा होगी। जिले में अवैध उत्खनन पर लगाम कसना और सरकारी धन के बंदरबांट को रोकना उनके लिए प्राथमिकता का विषय रहेगा।

बदलता नजरिया: नेता नहीं, अब समस्याओं के पीछे अधिकारी

रीवा में आमतौर पर अधिकारियों का झुकाव सत्ता पक्ष और वरिष्ठ नेताओं की ओर अधिक देखा जाता रहा है, लेकिन  सूर्यवंशी ने पहले ही दिन इस धारणा को तोड़ दिया। जहाँ अधिकारी अक्सर नेताओं के पीछे घूमते नजर आते हैं, वहीं नवागत कलेक्टर जनता की समस्याओं के पीछे भागते दिखे। उनके कड़े तेवरों से यह साफ है कि जिले में कानून और नियमों के विपरीत काम करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। कलेक्टर के इस 'सादा जीवन, उच्च विचार' और जन-केंद्रित कार्यशैली ने रीवा की जनता में एक नया विश्वास जगाया है। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में धरातल से विलुप्त हो रही योजनाओं को वे कितनी मजबूती से पुनर्जीवित कर पाते हैं।



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