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| नईगढ़ी जनपद में ‘लवी ट्रैवल्स’ के नाम पर बड़ा खेल: बिलों में 10 साल की बच्ची के हस्ताक्षर, मोबाइल नंबर रोजगार सहायक का! Aajtak24 News |
रीवा/नईगढ़ी - मध्य प्रदेश के रीवा जिले के अंतर्गत आने वाली जनपद पंचायत नईगढ़ी इन दिनों भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के केंद्र में है। तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) संजय सिंह के कार्यकाल के दौरान "लवी ट्रैवल्स" नामक फर्म को किए गए भुगतानों ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता कुंज बिहारी तिवारी द्वारा जुटाए गए दस्तावेजी साक्ष्य चीख-चीखकर यह गवाही दे रहे हैं कि यह मामला केवल सामान्य वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि सरकारी धन की बंदरबांट के लिए की गई एक सुनियोजित 'कूटरचना' (Forgery) का है।
मोबाइल नंबर का वो 'कनेक्शन' जिसने बिगाड़ा खेल
इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला तथ्य मोबाइल नंबर का मेल खाना है। "लवी ट्रैवल्स" द्वारा प्रस्तुत किए गए बिलों पर जो संपर्क नंबर (8966985717) दर्ज है, वही नंबर ग्राम पंचायत 'कोट' के दस्तावेजों में वहां के ग्राम रोजगार सहायक सुनील कुमार मिश्रा के नाम के आगे अंकित है। अब प्रश्न यह उठता है कि यदि लवी ट्रैवल्स एक स्वतंत्र व्यावसायिक फर्म थी, तो उसके बिलों पर पंचायत से जुड़े एक जिम्मेदार कर्मचारी का मोबाइल नंबर क्या कर रहा है? क्या यह माना जाए कि ट्रेवल एजेंसी का संचालन पर्दे के पीछे से पंचायत के ही कुछ रसूखदार लोग कर रहे थे? यह सीधा-सीधा हितों के टकराव (Conflict of Interest) और भ्रष्टाचार का मामला प्रतीत होता है।
मासूम के कंधे पर रखकर चलाई गई भ्रष्टाचार की बंदूक?
दस्तावेजों की पड़ताल में एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। फाइल में संलग्न समग्र आईडी और परिवार विवरण के अनुसार, 'लवी' नामक जिस सदस्य के नाम पर यह फर्म संचालित दिखाई गई है, उसकी जन्मतिथि 01/01/2012 दर्ज है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के समय वह बच्ची महज 10-11 वर्ष की थी। हैरानी की बात यह है कि बिलों पर हस्ताक्षर भी "लवी" के नाम से ही किए गए हैं। प्रशासनिक और कानूनी दृष्टि से यह असंभव है कि एक नाबालिग बच्ची किसी फर्म की प्रोपराइटर हो और सरकारी भुगतानों के लिए बिलों पर हस्ताक्षर करे। यह तथ्य स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि किसी मासूम के नाम का उपयोग करके सरकारी खजाने में सेंध लगाई गई है।
जांच रिपोर्ट पर उठते सवाल: साक्ष्य थे तो नजरअंदाज क्यों हुए?
इस पूरे मामले का सबसे विडंबनापूर्ण पहलू प्रशासनिक जांच की कार्यप्रणाली है। प्राप्त दस्तावेजों के शुरुआती पन्नों पर दर्ज एक विभागीय टिप्पणी में कहा गया है कि "शिकायत में पर्याप्त प्राथमिक साक्ष्य का अभाव है, अतः इसे आगे जांच योग्य नहीं माना जाता। वहीं, उसी फाइल के पिछले पन्नों पर लवी ट्रैवल्स के बिल, भुगतान की प्रविष्टियां, मोबाइल नंबरों का मिलान और समग्र आईडी के विवरण जैसे ठोस साक्ष्य मौजूद हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या जांच अधिकारियों ने फाइल के पिछले पन्नों को जानबूझकर नहीं देखा? यदि ये दस्तावेज जांच दल के सामने थे, तो शिकायत को 'तथ्यहीन' बताकर खारिज करने का आधार क्या था? यह स्थिति प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगाती है और दोषियों को संरक्षण देने की ओर इशारा करती है।
गायब दस्तावेज और 'बंदरबांट' की तैयारी
शिकायतकर्ता ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया है—वर्ष 2022 से पहले के महत्वपूर्ण दस्तावेजों का गायब होना। जनपद पंचायत से अभिलेखों का गुम होना कोई सामान्य घटना नहीं है। यह अक्सर तब होता है जब पिछले भ्रष्टाचार के निशानों को मिटाना हो। गायब हुए दस्तावेजों का संबंध भी उन्हीं मदों से बताया जा रहा है जिनमें "लवी ट्रैवल्स" जैसे भुगतान किए गए थे।
शिकायतकर्ता का संकल्प: "न्यायालय तक लड़ी जाएगी लड़ाई"
कुंज बिहारी तिवारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि नईगढ़ी जनपद में जो कुछ भी हुआ है, वह जनता के टैक्स के पैसे की खुलेआम लूट है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचारियों की पकड़ ऊपर तक होने के कारण स्थानीय स्तर पर उन्हें बचाया जा रहा है। तिवारी ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन ने इस मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच (जैसे फोरेंसिक जांच और हस्ताक्षरों का सत्यापन) नहीं कराई, तो वे उच्च न्यायालय की शरण लेंगे।
निष्पक्ष जांच की दरकार
नईगढ़ी का यह 'लवी ट्रैवल्स' कांड अब केवल नईगढ़ी तक सीमित नहीं रह गया है। यह रीवा जिले के प्रशासनिक ढांचे की साख का सवाल बन चुका है। जनता अब जवाब मांग रही है:
क्या उस 10 साल की बच्ची के हस्ताक्षरों का मिलान किया जाएगा?
क्या रोजगार सहायक और तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका तय होगी?
क्या गायब हुए दस्तावेजों को वापस लाकर दोषियों को जेल भेजा जाएगा?
भ्रष्टाचार के इस मकड़जाल में केवल कागजी खानापूर्ति से काम नहीं चलेगा। यदि प्रशासन अपनी साख बचाना चाहता है, तो उसे इन दस्तावेजों की सूक्ष्म पड़ताल कर सच को सामने लाना ही होगा।
