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| NH-30 और NH-35 पर 'मौत का जाल'; मानकों की बलि चढ़ा भ्रष्टाचार, जनता पूछ रही—कब तक होगी टोल के नाम पर लूट? Aajtak24 News |
रीवा/मऊगंज - देश की तरक्की के दावे अक्सर चमचमाते नेशनल हाईवे के जरिए पेश किए जाते हैं, लेकिन रीवा और मऊगंज से गुजरने वाले NH-30 और NH-35 की हकीकत इन दावों के बिल्कुल उलट है। 'आजतक 24' की विशेष पड़ताल में यह कड़वा सच सामने आया है कि इन राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करना अब अपनी जान जोखिम में डालने जैसा है। निर्माण कंपनियों की मनमानी और घटिया निर्माण ने इन सड़कों को 'एक्सीडेंट ज़ोन' में तब्दील कर दिया है।
सर्विस रोड की 'अधूरी' कहानी: भ्रष्टाचार की जुबानी
नेशनल हाईवे के नियमों के अनुसार, शहरी और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सर्विस रोड का होना अनिवार्य है, ताकि स्थानीय यातायात मुख्य मार्ग के हाई-स्पीड ट्रैफिक में बाधा न बने। लेकिन गढ़ और कलवारी जैसे प्रमुख स्थानों पर सर्विस रोड का निर्माण आधा-अधूरा ही छोड़ दिया गया है। 'आजतक 24' की टीम ने जब मौके पर जाकर देखा, तो पाया कि सर्विस रोड को मुख्य सड़क से जोड़ने वाले हिस्से या तो बने ही नहीं हैं या वहां जानलेवा गड्ढे हैं। अचानक हाईवे से नीचे उतरते समय या ऊपर चढ़ते समय वाहन असंतुलित होकर पलट रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि "फोरलेन सड़क के नाम पर हमारे साथ मजाक हुआ है, ग्रामीण सड़कें इससे कहीं बेहतर और सुरक्षित हैं।"
मानकों की खुली धज्जियां और प्रशासन का मौन
सड़क निर्माण के दौरान सामग्री की गुणवत्ता और कर्व्स (मोड़) के डिजाइन पर विशेष ध्यान दिया जाता है, लेकिन NH-30 पर कई मोड़ इतने खतरनाक हैं कि तेज रफ्तार वाहन उन्हें संभाल नहीं पाते। आरोप है कि निर्माण कंपनी ने लागत बचाने के चक्कर में फोरलेन के निर्धारित मानकों (NHAI Standards) को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। इसके बावजूद, संबंधित विभाग के अधिकारियों ने इस घटिया निर्माण को हरी झंडी दे दी, जो एक बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
टोल लूट: सुविधा नहीं, फिर टैक्स क्यों?
जनता के आक्रोश का सबसे बड़ा कारण है टोल टैक्स। नियमों के मुताबिक, जब तक राजमार्ग का निर्माण 100% पूर्ण न हो जाए और यात्रियों को पूरी सुरक्षा न मिले, तब तक 'फुल टोल' वसूलना अपराध की श्रेणी में आता है। रीवा और मऊगंज की जनता का तर्क है कि जब सड़क अधूरी है, सर्विस रोड गायब है और हर कदम पर गड्ढे हैं, तो प्रशासन टोल प्लाजा पर पूरी दर से वसूली कैसे होने दे रहा है?
जनता की हुंकार: ठेकेदार पर दर्ज हो FIR
हाल ही में दिल्ली और अन्य महानगरों में हुए सड़क हादसों के बाद सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का हवाला देते हुए स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सड़क की तकनीकी खराबी के कारण होने वाली हर मौत के लिए सीधे तौर पर निर्माण कंपनी और उसके इंजीनियरों को दोषी माना जाए। जनता की स्पष्ट मांग है:
गढ़ और कलवारी की सर्विस रोड को एक महीने के भीतर मानकों के अनुसार पूरा किया जाए।
जब तक कार्य पूर्ण नहीं होता, टोल टैक्स की दरें 50% कम की जाएं।
निर्माण में लापरवाही बरतने वाली कंपनी का लाइसेंस निरस्त कर उस पर भारी जुर्माना लगाया जाए।
ड़कें इंसानों की सहूलियत के लिए बनाई जाती हैं, उन्हें मारने के लिए नहीं। यदि प्रशासन ने समय रहते निर्माण कंपनी पर नकेल नहीं कसी, तो रीवा-मऊगंज की जनता उग्र आंदोलन और चक्काजाम के लिए विवश होगी।
