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| अखंड भारत में लुप्त होते संस्कार और गौ-माता की दुर्दशा: एक गंभीर चिंतन Aajtak24 News |
रीवा - भारत भूमि, जिसे ऋषि-मुनियों, कृषि और युवाओं की समानता का देश कहा जाता है, आज एक वैचारिक संक्रमण काल से गुजर रही है। जिस धरती पर कभी दूध-दही की नदियां बहती थीं और जहाँ 'गौ, गंगा, गायत्री, ब्राह्मण, कन्या और दिव्यांग' पूजे जाते थे, आज उसी देश में सनातन धर्म की बुनियादी मान्यताओं पर प्रहार हो रहा है।
गौ-माता की दयनीय स्थिति और मांस निर्यात का कलंक गौ-सेवक और गौ-पुत्र वैभव कुमार केसरवानी (डभौरा, रीवा) ने समाज की वर्तमान स्थिति पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि आज हमारी आराध्य गौ-माता किन परिस्थितियों से गुजर रही हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। सड़कों पर तड़पती और कूड़ा खाने को मजबूर गायें आज जैसे मौत की भीख मांग रही हों। विडंबना देखिए कि जिस देश में गाय को माँ माना जाता है, वह देश आज विश्व स्तर पर मांस निर्यात में दूसरे-तीसरे नंबर पर काबिज होकर 'कीर्तिमान' बना रहा है। गौ-तस्करी का जाल तेजी से फैल रहा है, जो हमारी आस्था पर गहरी चोट है।
समाज का नैतिक पतन और पद-प्रतिष्ठा की अंधी दौड़ लेख में इस बात पर जोर दिया गया कि पहले हर घर में तुलसी, गौ-माता और नशा-मुक्ति का वास होता था, लेकिन अब लोग तेजी से मांसाहार और नशे की ओर बढ़ रहे हैं। पाप बढ़ रहा है और धर्म-कर्म मात्र दिखावा बनकर रह गया है। आज का सभ्य समाज धन, दौलत, पद और प्रतिष्ठा पाने के लिए किसी भी हद तक गिरने को तैयार है। सेवा भाव समाप्त हो रहा है और स्वार्थ हावी है।
सेवकों के प्रति समाज का नजरिया सबसे दुखद पहलू यह है कि जो लोग आज भी निस्वार्थ भाव से गौ-सेवा, ब्राह्मण सेवा, कन्या पूजन या दिव्यांगों की मदद करते हैं, उन्हें समाज 'घृणित' निगाहों से देखता है। सेवाभावी लोगों को सभ्य समाज का दुश्मन समझा जाने लगा है। धर्म के नाम पर चंदाखोरी और कमाई के हथकंडे तो अपनाए जा रहे हैं, लेकिन वास्तविक सेवा करने वालों का तिरस्कार हो रहा है।
प्रलयकारी परिणामों की चेतावनी और सुधार की अपील वैभव कुमार केसरवानी ने चेताया है कि यदि सभ्य समाज समय रहते नहीं सुधरा, तो इस व्यवस्था और वसुंधरा के लिए इसके बहुत घातक दुष्परिणाम होंगे, जिसे आने वाली पीढ़ियों को भोगना पड़ेगा। उन्होंने अपील की है कि आइए, मानवता के लिए एक कदम बढ़ाएं। अखंड भारत को मजबूत करने के लिए नशे और मांसाहार का त्याग करें।
प्रमुख मांगें:
गौ-माता को 'राष्ट्र माता' का दर्जा दिया जाए।
गौ-तस्करी और हत्या पर पूर्णतः अंकुश लगे।
सनातन धर्म की मर्यादा को पुनः स्थापित कर हिंदू राष्ट्र की संकल्पना को साकार किया जाए।
अंत में, 'हर-हर महादेव' और 'जय श्री राम' के उद्घोष के साथ उन्होंने समाज से आह्वान किया है कि अपने जीवन को सुखमय बनाने के लिए सेवा मार्ग को चुनें और जरूरतमंदों का संबल बनें।
