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| NH-30 पर सफर नहीं, 'यमराज' को बुलावा! अधूरी सर्विस रोड और जानलेवा गड्ढों ने रीवा-मऊगंज के लोगों का जीना किया मुहाल Aajtak24 News |
रीवा/मऊगंज - विकास की चमक-धमक वाली दावों की पोल अब राष्ट्रीय राजमार्ग 30 (NH-30) और NH-35 पर खुलती नजर आ रही है। रीवा और मऊगंज के बीच का सफर अब आम जनता के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। फोरलेन के मानकों को ताक पर रखकर किए गए कथित 'घटिया' निर्माण और अधूरी सर्विस रोड ने इस मार्ग को दुर्घटनाओं का हॉटस्पॉट बना दिया है। स्थानीय जनता का आक्रोश अब फूट पड़ा है और वे निर्माण कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
मानकों की अनदेखी: फोरलेन के नाम पर खानापूर्ति?
क्षेत्रीय निवासियों का आरोप है कि NH-30 और NH-35 का निर्माण करते समय सुरक्षा मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं। सड़क की बनावट में ऐसी तकनीकी खामियां हैं जो किसी भी वाहन चालक के लिए घातक साबित हो सकती हैं। विशेषकर गढ़ और कलवारी जैसे प्रमुख स्थानों पर सर्विस रोड का काम अधर में लटका हुआ है। मुख्य सड़क से जुड़ने वाले मोड़ इतने खतरनाक और अनियोजित हैं कि वहां आए दिन वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं।
'ग्रामीण सड़कों से भी बदतर हालत'
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन इसे 'नेशनल हाईवे' कहता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई ग्रामीण सड़कें भी इससे बेहतर स्थिति में हैं। सड़क के बीचों-बीच उभरे जानलेवा गड्ढे और अधूरी सर्विस रोड के कारण दोपहिया वाहन चालक सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। दिल्ली में हुई हालिया सड़क दुर्घटनाओं का उदाहरण देते हुए ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क निर्माण में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों पर सीधे तौर पर 'गैर-इरादतन हत्या' जैसा मुकदमा चलना चाहिए।
"जब तक सड़क पूरी तरह सुरक्षित और मानकों के अनुरूप तैयार न हो जाए, तब तक टोल की पूरी वसूली जनता के साथ अन्याय है।" — स्थानीय नागरिक
टोल टैक्स पर संग्राम: 'काम अधूरा, तो वसूली क्यों?'
सड़क की जर्जर हालत के बावजूद टोल प्लाजा पर नियमों का हवाला देकर पूरी दर से टैक्स वसूला जा रहा है। इसका कड़ा विरोध शुरू हो गया है। जनता का तर्क साफ है: शासन के नियमानुसार जब तक निर्माण कार्य 100% पूर्ण न हो और सुरक्षा ऑडिट न हो जाए, तब तक जनता से पूरा टैक्स लेना अनुचित है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क की मरम्मत और सर्विस रोड का काम पूरा नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।
जनता की मुख्य मांगें:
जवाबदेही तय हो: घटिया निर्माण और सुरक्षा में चूक के लिए जिम्मेदार निर्माण कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए और संबंधित अधिकारियों पर विभागीय जांच बैठे।
सर्विस रोड का निर्माण: गढ़ और कलवारी के पास अधूरी सर्विस रोड को मानकों के अनुसार तत्काल पूरा किया जाए।
टोल में रियायत: सड़क का कार्य पूर्ण होने तक टोल टैक्स की दरों में कटौती की जाए।
सुरक्षा ऑडिट: पूरे स्ट्रेच का फिर से सेफ्टी ऑडिट कराया जाए ताकि 'ब्लैक स्पॉट्स' (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) को खत्म किया जा सके।
NH-30 पर बिखरे ये गड्ढे सिर्फ सड़क की दरारें नहीं हैं, बल्कि प्रशासन की संवेदनहीनता का प्रमाण हैं। क्या प्रशासन किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है, या समय रहते इन 'मौत के जालों' को साफ किया जाएगा? यह सवाल आज रीवा और मऊगंज का हर नागरिक पूछ रहा है।
