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| मनगवां में सरकारी जमीनों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' की तैयारी: संजय पांडे ने भू-माफिया और प्रशासन के गठजोड़ को ललकारा Aajtak24 News |
रीवा - मध्य प्रदेश के रीवा जिले की मनगवां विधानसभा क्षेत्र से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ करोड़ों रुपये की शासकीय जमीनों को खुर्द-बुर्द करने का कथित खेल चल रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर क्षेत्र के कद्दावर नेता संजय पांडे ने मोर्चा खोलते हुए प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा कि "मनगवां विधानसभा क्षेत्र भले ही आरक्षित वर्ग के लिए है, लेकिन इसे 'अनाथ' समझने की भूल न की जाए।" उनके इस बयान ने क्षेत्र की जनता और राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
राजस्व रिकॉर्ड में 'डिजिटल सेंधमारी' का आरोप
संजय पांडे ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाते हुए आरोप लगाया कि भू-माफियाओं के साथ मिलकर विभाग का जमीनी अमला कंप्यूटर खसरे में बड़े पैमाने पर हेरफेर कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई महत्वपूर्ण शासकीय संस्थाओं, स्कूलों और अस्पतालों के नाम राजस्व रिकॉर्ड से सोची-समझी साजिश के तहत विलुप्त किए जा रहे हैं। इस 'डिजिटल हेराफेरी' का एकमात्र उद्देश्य इन बेशकीमती जमीनों को निजी लाभ के लिए खुर्द-बुर्द करना और भू-माफियाओं के हवाले करना है।
गढ़ थाना परिसर: कब्जे की साजिश का केंद्र
इस विवाद का सबसे ताजा और गंभीर केंद्र गढ़ थाना क्षेत्र बना हुआ है। श्री पांडे ने तथ्यों के साथ बताया कि गढ़ पटवारी हल्का की भूमि क्रमांक 77, जिसका रकबा लगभग 1 एकड़ 62 डिसमिल है और जो बाजार के बिल्कुल हृदय स्थल पर स्थित है, उसे हड़पने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।
इस जमीन की वर्तमान स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है:
इसके एक बड़े हिस्से में शासकीय बालक हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित है, जहाँ सैकड़ों बच्चों का भविष्य जुड़ा है।
दूसरे हिस्से में पुराना थाना भवन और पुलिस क्वार्टर स्थित हैं, जिनमें वर्तमान में भी पुलिसकर्मी सपरिवार रह रहे हैं।
इतनी सक्रिय उपयोगिता के बावजूद, राजस्व रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर इस भूमि के स्वरूप को बदलने (लैंड यूज चेंज) की कोशिशें की जा रही हैं।
सत्ता का संरक्षण और 'आयातित' माफिया
संजय पांडे ने सीधे तौर पर सत्ताधारी दल के कुछ रसूखदारों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि रीवा शहर में जमीनों की लूट मचाने वाले माफिया अब ग्रामीण क्षेत्रों की ओर रुख कर चुके हैं। आरोप है कि प्रदेश की राजनीति के एक कद्दावर चेहरे का इन माफियाओं को वरदहस्त प्राप्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्कूल या थाना परिसर जैसी सार्वजनिक संपत्तियों पर बुलडोजर चलाने या उन्हें निजी हाथों में सौंपने की कोशिश की गई, तो मनगवां की जनता सड़कों पर उतरेगी।
प्रशासनिक लाचारी और भविष्य का संकट
रिपोर्ट में इस बात पर भी चिंता जताई गई है कि सरकारी विभाग अपनी ही जमीन बचाने के लिए पैरवी करने से कतरा रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि शासन के उच्च स्तर से इतना दबाव है कि अधिकारी मौन साधे हुए हैं। श्री पांडे ने आगाह किया कि यदि आज इन जमीनों को नहीं बचाया गया, तो भविष्य में शासकीय कार्यालयों, कॉलेजों या अस्पतालों के विस्तार के लिए प्रशासन के पास एक इंच जमीन नहीं बचेगी। भविष्य में ग्रामीण अंचल भी रीवा जिला मुख्यालय की तरह जमीन के अभाव में विकास कार्यों के लिए तरसेंगे।
सड़क से न्यायालय तक की लड़ाई का शंखनाद
संजय पांडे ने अपनी हुंकार में मनगवां के गौरवशाली राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि यहाँ की जनता ने देश को बड़े नेता दिए हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि इस मुद्दे को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखा जाएगा। यदि प्रशासन ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया और भू-माफियाओं पर लगाम नहीं कसी, तो वे राजस्व न्यायालय से लेकर हाई कोर्ट तक इस लड़ाई को ले जाएंगे।
