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| हनुमना के ग्राम लोढ़ी में खनिज माफियाओं का तांडव: लीज की आड़ में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा Aajtak24 News |
मऊगंज - रीवा संभाग के हनुमना तहसील अंतर्गत ग्राम लोढ़ी में पत्थर उत्खनन का एक बड़ा खेल सामने आया है। यहाँ खनिज माफिया न केवल नियमों को ताक पर रखकर अवैध उत्खनन कर रहे हैं, बल्कि भारी ब्लास्टिंग के जरिए जनजीवन को भी खतरे में डाल रहे हैं। इस मामले में पर्यावरण कार्यकर्ता और अधिवक्ता बी.के. माला ने मोर्चा खोलते हुए रीवा संभाग आयुक्त को एक विस्तृत शिकायती पत्र सौंपा है।
एनजीटी के नियमों की उड़ रही धज्जियां
अधिवक्ता माला ने अपनी शिकायत में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि लोढ़ी में पत्थर माफियाओं को जिस खसरा नंबर पर लीज आवंटित की गई है, उसे छोड़कर वे आसपास की कीमती सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा कर पत्थर निकाल रहे हैं। शिकायत में मुख्य रूप से स्थानीय रसूखदारों—शिव कुमार सिंह, रामनगीना सिंह और अभिषेक सिंह के संलिप्त होने का दावा किया गया है।
खौफ के साये में ग्रामीण: आबादी के पास हो रही ब्लास्टिंग
ग्राम लोढ़ी के निवासियों का जीवन इन दिनों भारी मशीनों के शोर और डरावने धमाकों के बीच बीत रहा है। अवैध खदानों में की जा रही हैवी ब्लास्टिंग के कारण ग्रामीणों के घरों में दरारें आने और मवेशियों के घायल होने का खतरा बढ़ गया है। आबादी क्षेत्र के बिल्कुल करीब हो रही इन गतिविधियों से वायु और ध्वनि प्रदूषण भी चरम पर है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
राजस्व और जीएसटी की बड़ी चपत
अधिवक्ता बी.के. माला ने शिकायत में वित्तीय अनियमितताओं की ओर भी इशारा किया है। उन्होंने उल्लेख किया कि निर्धारित सीमा से बाहर जाकर उत्खनन करने के कारण शासन को मिलने वाली रॉयल्टी, खनिज राजस्व और जीएसटी (GST) की भारी चोरी की जा रही है। माफिया अवैध रूप से पत्थर पटियों का परिवहन कर लाखों का चूना लगा रहे हैं। साक्ष्य के तौर पर शिकायत के साथ प्रभावित खसरा नंबरों की सूची और अवैध उत्खनन के फोटोग्राफ भी आयुक्त को सौंपे गए हैं।
प्रशासन से त्वरित कार्यवाही की मांग
शिकायतकर्ता ने संभाग आयुक्त से मांग की है कि ग्राम लोढ़ी में तत्काल एक जांच दल भेजा जाए और अवैध उत्खनन पर रोक लगाते हुए दोषियों पर भारी जुर्माना व कानूनी कार्यवाही की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।
