रीवा संभाग में माफिया का 'अरबों का खेल': पत्थर-बालू के अवैध उत्खनन से शासन को प्रतिमाह राजस्व की भारी चपत Aajtak24 News

रीवा संभाग में माफिया का 'अरबों का खेल': पत्थर-बालू के अवैध उत्खनन से शासन को प्रतिमाह राजस्व की भारी चपत Aajtak24 News

रीवा - रीवा संभाग के अंतर्गत आने वाले 6 जिलों—रीवा, मैहर, सतना, सीधी और सिंगरौली में अवैध उत्खनन का कारोबार जोर-शोर से जारी है। माफिया द्वारा प्रचुर मात्रा में पत्थर, पटिया, बालू और मुरूम का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। इस संगठित अवैध गतिविधि से शासन को अरबों रुपये प्रतिमाह राजस्व की हानि हो रही है। स्थानीय निवासियों और जागरूक नागरिकों ने संभागीय आयुक्त (कमिश्नर) से विशेष टीम गठित कर ऐसे अवैध कार्यों को चिन्हित करने और तत्काल रोकने की पुरजोर मांग की है।

मैहर में देवरी-ककरा के बीच खदान चर्चा का विषय

अवैध उत्खनन की कड़ी में, मैहर के देवरी और ककरा ग्राम के बीच कुबरी क्षेत्र में संचालित एक खदान इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के अनुसार, यह खदान सुखदेव प्रसाद गोयनका की बताई जा रही है। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि खदान का संचालन बिना किसी सुरक्षा घेरे या उचित मापदंडों के किया जा रहा है।

प्रमुख समस्याएँ और नियमों का उल्लंघन

वायरल वीडियो और ग्रामीणों के आरोपों के अनुसार, खदान संचालक नियमों की सरेआम धज्जियाँ उड़ा रहे हैं:

  • रिहायशी और कृषि क्षेत्र के करीब: खदान के चारों ओर उपजाऊ कृषि भूमि है। स्थानीय ग्रामीण, महिलाएँ और बच्चे खदान के बिल्कुल किनारे असुरक्षित खड़े नजर आ रहे हैं, जिससे किसी भी समय बड़ी दुर्घटना होने का अंदेशा बना रहता है।

  • प्रदूषण की अनदेखी: स्थानीय निवासियों का आरोप है कि खदान से निकलने वाली धूल और मलबे से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँच रहा है। ग्रामीणों ने प्रदूषण विभाग के अधिकारियों पर भी कागजों पर खानापूर्ति करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

  • भारी मशीनरी का दुरुपयोग: वीडियो में JCB और डंपरों का जिस तरह से उपयोग किया जा रहा है, वह स्पष्ट करता है कि खदान संचालक को प्रशासन का कोई भय नहीं है।

प्रशासनिक निष्क्रियता पर तीखे सवाल

वीडियो में रिपोर्टर ने मैहर के खनिज विभाग और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं। आरोप है कि खदान संचालन की अनुमति देने के बाद विभाग 'कुंभकर्णी नींद' में सो गया है। नियमों को कुचलकर खदान का संचालन किया जा रहा है, लेकिन अधिकारी आँखें मूंदे बैठे हैं। ग्रामीणों का दृढ़ विश्वास है कि प्रशासनिक अमले और खदान संचालकों के बीच निजी साठगांठ के कारण ही यह अवैध और असुरक्षित कार्य बेधड़क जारी है। रीवा संभाग प्रशासन और खनिज अधिकारियों की चुप्पी कई संदेह पैदा करती है। अब देखना यह है कि इस वीडियो के वायरल होने और राजस्व के भारी नुकसान की बात सामने आने के बाद क्या प्रशासन जागता है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर ठोस कार्रवाई करता है, या फिर ग्रामीण इसी तरह खतरों के बीच जीने को मजबूर रहेंगे।



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