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| रीवा में 'अपराधियों' का इंक्रीमेंट: दिन में सट्टा और रात में जुआ, राजू 'छैला' बना अवैध साम्राज्य का नया CEO! Aajtak24 News |
रीवा - रीवा के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में इन दिनों विकास की एक नई परिभाषा लिखी जा रही है। यहाँ किसी शिक्षित युवा को नौकरी मिले न मिले, लेकिन अपराधियों की 'पदोन्नति' (Promotion) पक्की है। शहर के सट्टा बाजार का पुराना खिलाड़ी राजू उर्फ 'छैला' अब इस अवैध धंधे का 'मैनेजिंग डायरेक्टर' बनकर उभरा है।
वर्किंग शिफ्ट: सुबह सट्टा, रात को जुआ
राजू 'छैला' के काम करने का अंदाज किसी कॉर्पोरेट कंपनी से कम नहीं है। सूत्रों की मानें तो दिन की रोशनी में वह सट्टे की पर्चियां कटवाता है और जैसे ही शहर की लाइटें जलती हैं, उसकी 'नाइट शिफ्ट' शुरू हो जाती है। रात के अंधेरे में हजारों-लाखों के दांव वाली जुए की फड़ सजती है, जहाँ शहर की बर्बादी की स्क्रिप्ट लिखी जा रही है।
सिस्टम की 'मेहरबानी' या पुलिस की 'लाचारी'?
हैरानी की बात यह है कि सिटी कोतवाली पुलिस की नाक के नीचे यह पूरा नेटवर्क फल-फूल रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या अपराधियों के लिए भी कोई 'प्रमोशन पॉलिसी' लागू हो गई है? बिना किसी खाकी के खौफ के, एक छोटा सटोरिया देखते ही देखते जुए की फड़ का सरताज बन गया। स्थानीय लोगों का दबी जुबान में कहना है कि यह 'तरक्की' बिना किसी 'ऊपरी संरक्षण' के मुमकिन नहीं है।
आम जनता के चुभते सवाल:
क्या रीवा पुलिस को इस 'छैला' के कारनामों की भनक तक नहीं है?
क्या अवैध कारोबारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें कानून का तमाशा बनाने में डर नहीं लगता?
आखिर कब तक आम आदमी की गाढ़ी कमाई सट्टे और जुए की भेंट चढ़ती रहेगी?
रीवा पुलिस की चुप्पी पर उठते सवाल
शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि अगर समय रहते इस 'पदोन्नति' पर लगाम नहीं लगाई गई, तो अपराधियों का यह बढ़ता कद शहर की शांति के लिए घातक साबित होगा। अब देखना यह है कि रीवा पुलिस इस 'छैला' के अवैध साम्राज्य पर कब अपनी 'डिमोशन' की कार्रवाई करती है, या फिर यह 'अवैध खेल' यूं ही कोतवाली की चौखट के पास जारी रहेगा।
