सेवा का 'वैभव': बिना किसी पद और संस्था के रीवा का यह युवा बना रहा है मिसाल, पिता के संकल्प को बनाया जीवन का ध्येय Aajtak24 News

सेवा का 'वैभव': बिना किसी पद और संस्था के रीवा का यह युवा बना रहा है मिसाल, पिता के संकल्प को बनाया जीवन का ध्येय Aajtak24 News

रीवा - वर्तमान दौर में जहाँ समाजसेवा अक्सर राजनीति या पद की लालसा से प्रेरित होती है, वहीं मध्य प्रदेश के रीवा जिले के डभौरा (कोटवा खास) के वैभव कुमार केसरवानी एक अलग ही लकीर खींच रहे हैं। बिना किसी सरकारी पद, बिना किसी एनजीओ (NGO) और बिना किसी दिखावे के, वैभव पिछले कई वर्षों से शिक्षा, गौ-सेवा और बेसहारा लोगों की मदद में जुटे हुए हैं। उनके लिए सेवा केवल एक कार्य नहीं, बल्कि पिता से मिली विरासत और जीवन का संस्कार है।

विरासत में मिली सेवा की लौ

वैभव कुमार केसरवानी का जन्म एक साधारण वैश्य परिवार में हुआ। उनके पिता, स्वर्गीय श्री छकौड़ी लाल केसरवानी, क्षेत्र के एक सम्मानित व्यक्तित्व और ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच थे। छकौड़ी लाल जी का जीवन संघर्षों और सेवा की मिसाल रहा; उन्होंने गरीबों और दिव्यांगों के हक की लड़ाई लड़ते हुए कई बार जेल की यात्रा भी की। अपने अंतिम समय में उन्होंने वैभव को एक ही गुरुमंत्र दिया था— "असहायों की आवाज बनना ही मेरी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।" आज वैभव उसी संकल्प को पूरी शिद्दत से जी रहे हैं।

शिक्षा और दिव्यांगों के लिए समर्पित जीवन

वैभव का मानना है कि शिक्षा ही समाज में बदलाव का सबसे सशक्त माध्यम है। वे वर्षों से आर्थिक रूप से कमजोर और दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च वहन कर रहे हैं। विशेष रूप से उन बच्चों को दोबारा स्कूल तक पहुँचाना, जिन्होंने गरीबी के कारण पढ़ाई छोड़ दी थी, वैभव की प्राथमिकता रही है। इसके अलावा, वे नशा मुक्ति अभियान और शत-प्रतिशत मतदान जैसी सामाजिक जागरूकता गतिविधियों में भी सक्रिय रहते हैं।

गौ-सेवा और बेजुबानों का सहारा

गौ-वंश के प्रति वैभव का समर्पण अनुकरणीय है। डभौरा और आसपास के ग्रामीण अंचलों में जब भी कोई गौवंश बीमार या निराश्रित पाया जाता है, वैभव तुरंत उनके चारे, भूसे और उपचार की व्यवस्था करते हैं। इस नेक कार्य में उन्हें अपनी धर्मपत्नी का भरपूर सहयोग मिलता है, जो अपनी मेहनत की कमाई का एक हिस्सा समाजसेवा में लगाकर इस मिशन को मजबूती प्रदान करती हैं।

बिना पद, मिला प्रशासन का सम्मान

वैभव केसरवानी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे किसी संस्था के बैनर तले काम नहीं करते, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर अपनी आय से दूसरों की मदद करते हैं। उनकी इसी निस्वार्थ भावना को देखते हुए समय-समय पर कलेक्टर, एसपी, डीएसपी, एसडीएम और तहसीलदार जैसे प्रशासनिक अधिकारियों सहित प्रदेश स्तर के दिग्गज नेताओं द्वारा उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।

संकल्प: "कोई भूखा न सोए"

वैभव कहते हैं, "मानवता और संविधान को सर्वोपरि मानकर की गई सेवा ही सच्चा राष्ट्रधर्म है।" उनका एकमात्र सपना है कि उनके क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए और हर बच्चे के हाथ में किताब हो। ग्रामीण अंचल से निकलकर पूरे मध्य प्रदेश में अपनी पहचान बनाने वाले वैभव कुमार आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं, जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं। वैभव कुमार केसरवानी का जीवन यह सिद्ध करता है कि बड़े बदलाव के लिए बड़े पद की नहीं, बल्कि बड़े दिल और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है।



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