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| भावुक क्षण: प्रमाण पत्र पाकर पूर्व विधायक राजेंद्र मिश्रा के चरणों में झुके मृत्युंजय, जीत को बताया पिता को सच्ची श्रद्धांजलि |
गुरु और शिष्य के मिलन से नम हुई आंखें
इस मुलाकात के दौरान माहौल तब बेहद भावुक हो गया जब मृत्युंजय ने अपनी जीत का श्रेय राजेंद्र मिश्रा को देते हुए कहा, "मैंने सबसे पहले अपने बाबा का आशीर्वाद लिया और आप मेरे छोटे बाबा हैं। आपने मुझे राजनीति में लाने के लिए पहले भी बहुत प्रयास किए और गंगेव ब्लॉक का अध्यक्ष भी बनवाया था।" यह सुनकर पूर्व विधायक राजेंद्र मिश्रा की आंखें भी भर आईं और उन्होंने मृत्युंजय को गले लगाकर आशीर्वाद दिया।
पिता की विरासत और जनता का आदेश
मृत्युंजय ने भावुक होते हुए पुरानी यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनके पिता स्व. अश्वनी कुमार मुन्ना खैर सक्रिय राजनीति में थे और वही वार्ड 16 के निर्वाचित सदस्य थे। लंबी बीमारी के कारण उनके स्वर्गवास के बाद परिवार राजनीति से दूर रहना चाहता था, लेकिन वार्ड 16 की जनता और पिता के समर्थकों ने उन्हें चुनाव लड़ने का आदेश दिया।
1275 वोटों से मिली 'श्रद्धांजलि रूपी' जीत
मृत्युंजय ने कहा कि यह जीत उनकी नहीं, बल्कि उनके पूज्य पिताजी के प्रति जनता के प्रेम की जीत है। वार्ड 16 की जनता ने स्व. मुन्ना खैर जी को सच्ची श्रद्धांजलि देते हुए मृत्युंजय को 1275 वोटों के भारी अंतर से विजयी बनाया है। उन्होंने चुनाव के दौरान मिले सहयोग के लिए राजेंद्र मिश्रा का आभार व्यक्त किया।
विरासत अब सुरक्षित हाथों में
पूर्व विधायक राजेंद्र मिश्रा ने मृत्युंजय के सिर पर हाथ रखकर उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। समर्थकों का मानना है कि इस जीत से न केवल वार्ड 16 के विकास को गति मिलेगी, बल्कि स्व. अश्वनी कुमार मुन्ना खैर द्वारा शुरू किए गए जनसेवा के कार्यों को उनका पुत्र अब और आगे बढ़ाएगा।
