अंधेर नगरी, चौपट राजा! न्यायालय के स्टे के बावजूद रक्सा माजन में धड़ल्ले से जारी निर्माण कार्य Aajtak24 News

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रीवा/गंगेव - जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत ग्राम पंचायत रक्सा माजन में इन दिनों कानून व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है। आरोप है कि माननीय न्यायालय द्वारा विवादित भूमि पर निर्माण कार्य रोकने (स्टे) के स्पष्ट आदेश जारी करने के बावजूद सरपंच द्वारा बेखौफ होकर निर्माण कार्य जारी रखा जा रहा है। मामले को और अधिक गंभीर सरपंच द्वारा अधिकारियों को कथित रूप से "सेवा शुल्क" (घूस) देने की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना बना रहा है, जिससे प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार की बू आ रही है।

न्यायालय के आदेश को ठेंगा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रक्सा माजन पंचायत में एक विशिष्ट भूमि पर निर्माण कार्य को लेकर विवाद न्यायालय में विचाराधीन है। इस मामले में न्यायालय ने वस्तुस्थिति यथावत रखने और निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश दिया था। ग्रामीणों का आरोप है कि न्यायालय की अवमानना करते हुए सरपंच अपनी मनमानी पर उतारू हैं और धड़ल्ले से निर्माण कार्य करा रहे हैं। जब ग्रामीणों ने उन्हें न्यायालय के आदेश की प्रति दिखाकर कार्य रोकने का आग्रह किया, तो उन्हें न केवल नजरअंदाज कर दिया गया, बल्कि धमकियां भी दी गईं।

विवादास्पद बयान: "कानून से नहीं, सेवा शुल्क से चलता है काम"

इस पूरी घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू सरपंच द्वारा सार्वजनिक रूप से दिया गया बयान है। ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण कार्य का विरोध करने पर सरपंच ने कथित रूप से कहा, "कानून-वानून से कुछ नहीं होता, काम तो 'सेवा शुल्क' (घूस) से चलता है। मैं अधिकारियों को सेवा शुल्क दे चुका हूं, अब मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। जो मैं करूंगा वही कानून होगा।"

सरपंच का यह बयान न केवल न्यायालय की अवमानना है, बल्कि यह भ्रष्टाचार की खुली स्वीकारोक्ति भी है। इस बयान के बाद ग्रामीणों में यह चर्चा आम हो गई है कि पंचायत से लेकर जनपद स्तर तक के अधिकारियों ने सरपंच को खुली छूट दे रखी है।

प्रशासनिक मौन पर सवाल

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य के संबंध में उन्होंने ब्लॉक स्तर से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारियों को लिखित शिकायतें सौंपी थीं। इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर जनता का विश्वास डगमगा रहा है। यह मौन प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करता है, जहां कानून को ताक पर रखकर निजी स्वार्थों को साधने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्रामीणों में भारी आक्रोश और आंदोलन की चेतावनी

इस स्थिति से ग्रामीणों में भारी असंतोष और आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से जिला कलेक्टर और पंचायत राज विभाग को ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करने वाले सरपंच और उन्हें शह देने वाले अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो वे कलेक्ट्रेट के सामने आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था के लिए चुनौती

रक्सा माजन का यह मामला केवल एक पंचायत का विवाद नहीं है, बल्कि यह शासन-प्रशासन की पारदर्शिता और कानून के प्रति प्रतिबद्धता की भी परीक्षा बन गया है। यदि न्यायालय के आदेशों को इस प्रकार आम जनता के सामने धता बताया जाता रहा, तो लोकतंत्र के प्रति लोगों का भरोसा खत्म हो जाएगा। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या वे इस कानून विरोधी कृत्य के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हैं या नहीं।



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