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| भोपाल में खाकी पर दाग: पत्थरबाजी में गरीब मजदूर का पैर टूटा, ACP के आदेश के बाद भी थाना प्रभारी ने नहीं की FIR Aajtak24 News |
भोपाल - राजधानी के नारियलखेड़ा क्षेत्र में कानून व्यवस्था और पुलिस की संवेदनहीनता का एक रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक ओर दबंगों ने एक गरीब मजदूर के घर पर ईंट-पत्थरों से हमला कर उसका पैर तोड़ दिया, वहीं दूसरी ओर गौतम नगर थाना पुलिस अपराधियों को बचाने और पीड़ित को ही चुप कराने में जुटी हुई है।
क्या है पूरा मामला? पीड़ित मनीष अरोरा, निवासी म.न.-66, नारियलखेड़ा ने बताया कि उनके पड़ोस में रहने वाले राजेंद्र सरोज उर्फ चिन्नू ने बीते 11 जनवरी की रात अपने तीन मंजिला मकान की छत से पीड़ित के चादर वाले घर पर भारी पथराव किया। इस हमले में एक बड़ा पत्थर लगने से मनीष के पैर में गंभीर फ्रैक्चर हो गया। हमले के समय पीड़ित का परिवार सो रहा था, यदि पत्थर सिर पर लगता तो किसी की जान भी जा सकती थी।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल हैरानी की बात यह है कि जब पीड़ित शिकायत लेकर थाने पहुँचा, तो पुलिस ने मात्र साधारण NCR काटकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की। पीड़ित का आरोप है कि हमीदिया अस्पताल में मेडिकल के दौरान साथ गए पुलिसकर्मियों ने डॉक्टर को यह कहकर X-ray करने से रोक दिया कि इसकी कोई जरूरत नहीं है। बाद में जब पीड़ित ने निजी अस्पताल में X-ray कराया, तो उसमें फ्रैक्चर की पुष्टि हुई।
ACP के आदेश को भी ठेंगे पर रखा जब थाना स्तर पर सुनवाई नहीं हुई, तो पीड़ित मनीष अरोरा ने ACP कार्यालय में गुहार लगाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए ACP ने तत्काल गौतम नगर थाना प्रभारी (TI) महेंद्र सिंह ठाकुर को FIR दर्ज करने के आदेश दिए। लेकिन, जब पीड़ित रात 8 बजे थाने पहुँचा, तो TI ने दो घंटे बैठाए रखने के बाद साफ कह दिया कि— "FIR दर्ज नहीं होगी, तुम्हें जहाँ शिकायत करनी है कर दो।"
पीड़ित परिवार दहशत में वर्तमान में मनीष अरोरा बिस्तर पर हैं और मेहनत-मजदूरी करने में असमर्थ हैं। उनके छोटे-छोटे बच्चों और परिवार के भरण-पोषण पर संकट खड़ा हो गया है। वहीं आरोपी राजेंद्र सरोज खुलेआम घूम रहा है और पीड़ित परिवार को फिर से हमला करने की धमकी दे रहा है। पुलिस द्वारा पीड़ित को ही धाराएं लगाकर अंदर करने की धमकी दी जा रही है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या भोपाल में आम आदमी के लिए न्याय के दरवाजे बंद हो चुके हैं? क्या वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की थाने में कोई कीमत नहीं है? पीड़ित ने अब पुलिस कमिश्नर और मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है।
