![]() |
| रीवा-मऊगंज में खनिज माफिया का तांडव: 100 फीट गहरे गड्ढों में समा रहा राजस्व, एनजीटी सख्त पर स्थानीय तंत्र मौन Aajtak24 News |
रीवा/मऊगंज - विंध्य क्षेत्र के रीवा और नवनिर्मित मऊगंज जिले में खनिज माफिया, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत से अवैध उत्खनन का काला खेल बदस्तूर जारी है। नियमों को ताक पर रखकर की जा रही खुदाई से न केवल सरकार को अरबों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है, बल्कि पर्यावरण और स्थानीय आबादी के अस्तित्व पर भी गंभीर संकट मंडरा रहा है।
मऊगंज: नए जिले में माफियाओं पर करोड़ों का जुर्माना
मऊगंज को नया जिला बनाए जाने के बाद प्रशासन ने कुछ सख्त कदम जरूर उठाए हैं, लेकिन माफिया का नेटवर्क अब भी सरकारी तंत्र पर हावी है।
बड़ी कार्रवाई: जुलाई 2025 में मऊगंज कलेक्टर ने ग्राम गोपला के एक अवैध पत्थर खनन मामले में आरोपी पर 3 करोड़ 32 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था।
10 करोड़ की पेनाल्टी: इससे पूर्व मई 2025 में भी विभिन्न माफिया समूहों पर सामूहिक रूप से 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया गया था।
अवैध ब्लास्टिंग: अक्टूबर 2025 में हर्रहा गांव में अवैध ब्लास्टिंग और क्रेशर संचालन ने स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की संलिप्तता की पोल खोल दी थी।
रीवा: एनजीटी की रडार पर खनन माफिया
रीवा जिले में अवैध खनन और पर्यावरणीय क्षति को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) लगातार सक्रिय है।
संयुक्त निरीक्षण: अगस्त 2025 में एनजीटी ने रीवा कलेक्टर और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त समिति गठित कर खनन स्थलों की तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी थी।
धार्मिक स्थलों पर खतरा: हुजूर तहसील की भलुहा पहाड़ी में अवैध खनन के कारण एक धार्मिक स्थल पर खतरा पैदा होने के बाद स्टोन क्रशरों को सील किया गया था। गुढ़ और हुजूर तहसील में भी अक्टूबर 2025 में एनजीटी की टीम ने औचक निरीक्षण किया।
खौफनाक मंजर: 100 फीट गहरे मौत के गड्ढे
त्योंथर, सिरमौर और मऊगंज के हनुमना क्षेत्र में अवैध खनन के कारण जमीन के सीने में 100 फीट तक के गहरे गड्ढे हो गए हैं।
नियमों की अनदेखी: माइनिंग नियमों के अनुसार खदान बंद होने के बाद गड्ढों का समतलीकरण और वृक्षारोपण अनिवार्य है, लेकिन खनिज विभाग की ढिलाई के कारण इन्हें खुला छोड़ दिया गया है।
आदिवासी बस्तियों में दहशत: जनवरी 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, आदिवासी बस्तियों के समीप हो रहे अवैध उत्खनन और ब्लास्टिंग से ग्रामीणों में भारी आक्रोश और दहशत का माहौल है।
अवैध व्यापार और राजस्व की लूट
पत्थर, मौरम और मिट्टी के इस अवैध कारोबार से मध्य प्रदेश सरकार को प्रतिवर्ष अरबों रुपये की हानि हो रही है। माफिया न केवल प्राकृतिक संसाधनों को लूट रहे हैं, बल्कि सरकारी खजाने को भी चपत लगा रहे हैं। यदि जिला प्रशासन सीएम हेल्पलाइन (181) और स्थानीय शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई नहीं करता है, तो विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च न्यायालय या एनजीटी (भोपाल) ही एकमात्र सहारा बचता है।
