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| तालाब की जमीन पर अवैध कब्जे और निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त, राजस्व विभाग को दिए अतिक्रमण हटाने के आदेश Aajtak24 News |
रीवा - प्रदेश की जल धरोहरों को संरक्षित करने और शासकीय तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में माननीय हाईकोर्ट जबलपुर ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। रीवा जिले के ग्राम पंचायत पुरास में स्थित शासकीय तालाब पर हुए अवैध कब्जों और निर्माण कार्यों को लेकर हाईकोर्ट ने राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि तालाब की भूमि को तत्काल प्रभाव से अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
क्या है पूरा मामला? मध्य प्रदेश शासन ने कुछ वर्ष पूर्व प्रदेश के सभी शासकीय तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करने का अभियान शुरू किया था। इसी कड़ी में रीवा के ग्राम पंचायत पुरास का मामला सामने आया, जहाँ स्थानीय दबंगों और कुछ लोगों द्वारा तालाब की बेशकीमती भूमि पर वर्षों से अवैध कब्जा जमाकर पक्के भवन निर्माण कर लिए गए थे। तालाब, जो जल संचय और स्थानीय निवासियों के लिए निस्तार का मुख्य साधन था, वह धीरे-धीरे निजी स्वार्थ की भेंट चढ़ता गया।
अस्पताल निर्माण पर उठे सवाल मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जिस जमीन पर मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन था, उसी शासकीय तालाब की भूमि पर लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा उप स्वास्थ्य केंद्र का भवन निर्माण कराया जा रहा है। याचिकाकर्ता अजय तिवारी द्वारा दायर पिटीशन में यह सवाल उठाया गया कि जब मामला कोर्ट में है, तो किस अधिकारी के आदेश पर शासकीय तालाब की जमीन पर अस्पताल का निर्माण शुरू किया गया? इस निर्माण के लिए जमीन का आवंटन किसने किया, यह अब जांच का विषय है।
हाईकोर्ट का सख्त रुख और ग्रामीणों में हर्ष याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जबलपुर ने जल निकायों के संरक्षण को सर्वोपरि माना है। कोर्ट ने राजस्व विभाग को निर्देशित किया है कि तालाब की मूल स्थिति बहाल की जाए और सभी प्रकार के अतिक्रमण हटाए जाएं। हाईकोर्ट के इस निर्णय का स्थानीय ग्रामीणों ने स्वागत किया है। ग्रामीणों का मानना है कि अतिक्रमण हटने से तालाब में पुनः जल भराव हो सकेगा, जिससे क्षेत्र के गिरते जलस्तर में सुधार होगा और मवेशियों व आम लोगों को सुविधा मिलेगी।
प्रशासनिक हलचल तेज कोर्ट के आदेश के बाद अब जिले के राजस्व अधिकारियों में खलबली मच गई है। आने वाले दिनों में चिन्हित किए गए अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलने की संभावना है। शासन की मंशा स्पष्ट है कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि और जल स्रोतों पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
