पंचायत और ब्लॉक स्तर तक पहुंचेगा ई-ऑफिस सिस्टम, ग्रामीण क्षेत्रों में भी सरकारी काम होंगे ऑनलाइन Aajtak24 News

पंचायत और ब्लॉक स्तर तक पहुंचेगा ई-ऑफिस सिस्टम, ग्रामीण क्षेत्रों में भी सरकारी काम होंगे ऑनलाइन Aajtak24 News

भोपाल  - मध्यप्रदेश में प्रशासनिक कार्यों को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब ई-ऑफिस सिस्टम का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों तक किया जाएगा, जिसके तहत तहसील और ब्लॉक स्तर के सरकारी कार्यालयों में भी यह व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है। इससे पंचायत और ब्लॉक स्तर पर होने वाले कई सरकारी काम ऑनलाइन हो सकेंगे और लोगों को कार्यालयों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्य सचिव कार्यालय जल्द ही ई-ऑफिस सिस्टम के क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करेगा। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देश जारी करेगा कि तहसील और ब्लॉक स्तर के सरकारी कार्यालयों में ई-ऑफिस सिस्टम लागू किया जाए। इस कदम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रशासनिक कामकाज को तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।

दरअसल प्रदेश सरकार ने 1 जनवरी 2025 से मंत्रालय में ई-ऑफिस सिस्टम लागू किया था, जिसका शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया था। इस प्रणाली को लागू करने का मुख्य उद्देश्य मंत्रालय के कामकाज में पारदर्शिता लाना, फाइलों के मूवमेंट को ऑनलाइन करना और कामकाज की गति बढ़ाना था। शुरुआत में अधिकारियों और कर्मचारियों को इस नई व्यवस्था में काम करने में कुछ दिक्कतें आईं, लेकिन समय के साथ अधिकांश कर्मचारी इस डिजिटल प्रणाली के आदी हो गए। वर्तमान में मंत्रालय में ई-ऑफिस सिस्टम के जरिए रोजाना 400 से अधिक फाइलों का ऑनलाइन मूवमेंट हो रहा है। मंत्रालय में सफलता मिलने के बाद सरकार ने दूसरे चरण में विभागाध्यक्ष कार्यालयों में और तीसरे चरण में जिला मुख्यालयों के सरकारी कार्यालयों में भी ई-ऑफिस सिस्टम लागू किया।

हालांकि जिलों में अभी भी कई अधिकारी-कर्मचारी इस डिजिटल प्रणाली पर काम करने से हिचकिचा रहे हैं, लेकिन मुख्य सचिव कार्यालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी सरकारी कार्यालयों में ई-ऑफिस सिस्टम पर काम करना अनिवार्य होगा। इसके बावजूद एक दिलचस्प स्थिति यह भी है कि मंत्रालय में ई-ऑफिस सिस्टम लागू हुए एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कई मंत्री अब तक फाइलों को मैन्युअल तरीके से ही आगे बढ़ा रहे हैं। जबकि मंत्रियों के निजी स्टाफ, निजी सचिव और सहायकों को ई-ऑफिस सिस्टम का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

एक क्लिक पर उपलब्ध होती है फाइल

ई-ऑफिस सिस्टम लागू होने के बाद सरकारी कार्यालयों में फाइलों का मूवमेंट काफी तेज हो गया है। इस प्रणाली में लिपिक से लेकर मुख्य सचिव तक हर स्तर पर फाइल निपटाने की समय-सीमा तय की गई है, जिससे अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय हो गई है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि हर फाइल को आसानी से ट्रेस किया जा सकता है। संबंधित विभाग का अधिकारी या कर्मचारी किसी भी फाइल की वर्तमान स्थिति और लोकेशन तुरंत देख सकता है। पहले जहां एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में फाइल ले जाने के लिए कर्मचारियों को स्वयं जाना पड़ता था, वहीं अब एक क्लिक पर फाइल कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाती है।

ई-ऑफिस सिस्टम के लागू होने से सरकारी कार्यालयों में कागजी रिकॉर्ड रखने की समस्या भी काफी हद तक खत्म हो गई है। इससे न केवल कार्यालयों में जगह की बचत हुई है, बल्कि कागज की खपत भी कम हुई है, जो पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि जब यह व्यवस्था तहसील, ब्लॉक और पंचायत स्तर तक पूरी तरह लागू हो जाएगी, तब ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी सरकारी सेवाओं का लाभ तेज, पारदर्शी और ऑनलाइन तरीके से मिल सकेगा।



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