रीवा में शर्मसार हुई डॉक्टरी: वार्ड में रील देखते रहे डॉक्टर, तड़प-तड़प कर महिला ने तोड़ा दम Aajtak24 News

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रीवा - मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े अस्पताल, श्यामशाह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध गांधी स्मारक चिकित्सालय (SGMH) में डॉक्टरों की संवेदनहीनता का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। जहाँ एक ओर डॉक्टरों को 'भगवान' का दर्जा दिया जाता है, वहीं यहाँ के स्टाफ पर आरोप है कि वे एक मरते हुए मरीज को छोड़कर मोबाइल पर 'रील' (Reels) देखने में मशगूल थे। इस लापरवाही की कीमत एक महिला को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

गुहार लगाते रहे परिजन, स्टाफ ने नहीं हटाई मोबाइल से नजर घटना करहिया निवासी श्रीनिवास कुशवाहा की पत्नी सुनीता कुशवाहा से जुड़ी है। सुनीता को बच्चेदानी के ऑपरेशन के लिए करीब एक महीने पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार, ऑपरेशन के बाद स्थिति में सुधार था, लेकिन पिछले दो-तीन दिनों से रात के समय उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी थी। बुधवार की देर रात जब सुनीता की हालत नाजुक हुई, तो उनके पति और परिजन वार्ड में मौजूद जूनियर डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के पास मदद की भीख मांगने पहुंचे।

पति श्रीनिवास का आरोप है कि जब उनकी पत्नी मौत से जंग लड़ रही थी, तब ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और स्टाफ मोबाइल पर सोशल मीडिया रील देखने में व्यस्त थे। आरोप है कि बार-बार जानकारी देने और गिड़गिड़ाने के बावजूद स्टाफ ने मोबाइल से नजर नहीं हटाई और समय पर प्राथमिक उपचार नहीं दिया। अंततः इलाज में हुई इसी देरी के कारण सुनीता ने दम तोड़ दिया।

परिजनों का फूटा गुस्सा, छावनी बना अस्पताल जैसे ही महिला की मौत की खबर फैली, परिजनों का सब्र टूट गया। आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अस्पताल में तनाव की स्थिति को देखते हुए अमहिया थाना पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह परिजनों को समझाया और मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया। पुलिस के दखल के बाद ही परिजन शव लेकर वहां से रवाना हुए।

प्रबंधन की सफाई: होगी उच्च स्तरीय जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए संजय गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने कहा, "मरीज की स्थिति क्रिटिकल थी और विशेषज्ञ डॉक्टरों ने भी उन्हें देखा था। परिजनों द्वारा रील देखने के आरोप अत्यंत गंभीर हैं। इस मामले के लिए एक जांच समिति गठित कर दी गई है। यदि रील देखने की बात सच साबित होती है, तो संबंधित डॉक्टर और स्टाफ के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।"

सरकारी व्यवस्था पर गहराता अविश्वास रीवा के इस प्रतिष्ठित अस्पताल से सामने आई यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़े सवाल खड़े करती है। एक तरफ सरकार स्वास्थ्य बजट में करोड़ों रुपये झोंक रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ कर्मचारियों की लापरवाही सरकारी अस्पतालों की साख को बट्टा लगा रही है। यही वजह है कि आज आम आदमी सरकारी मुफ्त इलाज के बजाय अपनी संपत्ति बेचकर निजी अस्पतालों में जाना सुरक्षित समझ रहा है।



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