रीवा: भ्रष्टाचार के दलदल में पंचायत! सरपंच-सचिव पर लाखों के गबन का आरोप Aajtak24 News

रीवा: भ्रष्टाचार के दलदल में पंचायत! सरपंच-सचिव पर लाखों के गबन का आरोप Aajtak24 News

रीवा - मध्य प्रदेश के रीवा जिले में पंचायती राज व्यवस्था के तहत चल रहे विकास कार्यों में भारी भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का एक बड़ा मामला सामने आया है। एक स्थानीय ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव पर सरकारी धन के दुरुपयोग और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप लगाते हुए जिला पंचायत सीईओ (CEO) को शिकायती आवेदन सौंपा गया है।

बाजार टैक्स से लेकर स्ट्रीट लाइट तक में 'खेल'

शिकायत में सबसे प्रमुख मुद्दा बाजार बैठकी (टैक्स) की राशि का है। आरोप है कि वर्ष 2023 से बाजार से वसूली गई लगभग ₹1.5 से ₹2 लाख की राशि पंचायत के आधिकारिक खाते में जमा ही नहीं की गई। नियमानुसार इस राशि की जानकारी ग्राम सभा को दी जानी चाहिए थी, लेकिन इसे गुप्त रखा गया। भ्रष्टाचार की आंच गांव की सड़कों तक भी पहुँची है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कई महीनों से स्ट्रीट लाइट के नाम पर पंचायत के खाते से लगातार भुगतान निकाला जा रहा है, जबकि धरातल पर गांव की गलियां आज भी अंधेरे में डूबी हैं।

अधूरे निर्माण और गुणवत्ताविहीन कार्य

निर्माण कार्यों में बंदरबांट का आलम यह है कि नाली निर्माण के नाम पर 6 महीने पहले ₹1.50 लाख निकाल लिए गए, लेकिन काम आज भी अधूरा और गुणवत्ताविहीन पड़ा है। इसी तरह, पुरानी गल्ला मंडी के पास सार्वजनिक कूप (कुएं) के चबूतरे के लिए राशि आहरित कर ली गई, पर निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हुआ।

पुरानी संपत्तियों पर नया 'ठप्पा' और मनरेगा फर्जीवाड़ा

शिकायत में सरपंच की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि पुरानी 'बावडिया' और तालाब के पुराने कार्यों को नया निर्माण दिखाकर दोबारा पैसा निकालने का प्रयास किया गया है। सबसे चौंकाने वाला खुलासा मनरेगा (MGNREGA) को लेकर हुआ है। आरोप है कि सरपंच अपने करीबियों के बैंक खातों में मजदूरी की राशि डलवाता है। उन 'फर्जी मजदूरों' को ₹200 से ₹400 का लालच देकर बाकी की बड़ी रकम नकद वापस ले ली जाती है। इस प्रकार वास्तविक मजदूरों का हक मारकर सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है।

जांच की मांग

ग्रामीणों ने जिला पंचायत सीईओ से मांग की है कि एक स्वतंत्र टीम गठित कर पंचायत के पिछले दो वर्षों के आय-व्यय और निर्माण कार्यों की भौतिक जांच कराई जाए। साथ ही, दोषी पाए जाने पर सरपंच और सचिव के खिलाफ गबन का मामला दर्ज कर वसूली की कार्रवाई की जाए।



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