किसानों को न समय पर खाद मिलती न खरीदी केंद्र में बारदाना, समस्या का समाधान आखिर कब होगा? Aajtak24 News

किसानों को न समय पर खाद मिलती न खरीदी केंद्र में बारदाना, समस्या का समाधान आखिर कब होगा? Aajtak24 News

रीवा/चाकघाट - क्षेत्र में खेती करने वाले किसानों के सामने बार-बार एक ही समस्य उभर कर आती है कि जब उन्हें खाद की जरूरत होती है तब उन्हें खाद नहीं मिलती और जब वे  अपनी खेतों में परिश्रम करके गेहूं अथवा धन की फसल तैयार करते हैं तो शासकीय खरीदी केंद्र में बोरी   (वारदाना) नहीं मिलता। चार-चार, पांच-पांच दिनों तक किसानों को खरीदी केंद्र में अपनी उपज के साथ रुकने के लिए मजबूर किया जाता है।  किसानों को धान य गेहूं पैदा करना है, उसके लिए किसान खाद मांगने जाए तो डंडा मिलता है। कतार में खड़े होकर महिलाओं तक को खाद के लिए गुहार लगानी पड़ती है, और जब फसल बेचना हो तो कहीं वारदाना की कमी तो कहीं तौल कराने वाले कर्मचारी नहीं। किसानों के साथ यह  अमानवीय कृत्य वास्तव में समस्या है या कोई षड्यंत्र?

किसान अपनी फसल का उत्पादन और उचित मूल्य पर फसल को समय पर कैसे बेच सकेगा ? जिले के विभिन्न अंचलों में कमोवेश ऐसी ही समस्याएं सब जगह है। किसान जाए तो आखिर कहां जाए? जनप्रतिनिधि उन्हीं की वोट से पैदा होते हैं और संकट के समय किसानों से मुंह मोड़ लेते हैं। देश के किसान  आखिर यह वेदना कब तक सहते रहेंगे। देश में आजादी के 78 वर्ष बाद भी किसानों की समस्या का स्थायी समाधान आखिर क्यों नहीं हो पा रहा है? इसमें सरकार की नीति गलत है य योजना को लागू करने वाले प्रशासन के लोग गलत है। कहीं न कहीं तो बड़ी गड़बड़ी चल रही है।  जब फसल की आनावारी पहले से दर्ज हो जाती है, धान बेचने वालों के लिए स्लाट बुक हो जाता है, यानी कि सरकार को पता रहता है कि किसानों कितनी खाद चाहिए? कितना धान एवं गेहूं की बिक्री होगी उसके बावजूद भी खाद एवं वरदान का अभाव निश्चित रूप से प्रशासन की लापरवाही है अथवा  बहुत बड़ा षड्यंत्र है जो किसानों के साथ किया जा रहा है।  इसका समाधान होना चाहिए। 



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