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| मऊगंज में बढ़ता सियासी पारा, क्या 'आयातित संस्कृति' भाजपा के मूल सिद्धांतों पर पड़ रही भारी? Aajtak24 News |
मऊगंज - मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर 'नए बनाम पुराने' और 'विचारधारा बनाम आयातित नेताओं' की जंग तेज होती दिख रही है। हाल ही में मऊगंज और इंदौर में हुई घटनाओं ने न केवल प्रदेश के राजनीतिक वातावरण को गरमा दिया है, बल्कि जनता के बीच भी नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा की वर्तमान कार्यशैली कांग्रेस के उस पुराने दौर की याद दिला रही है, जिसे भाजपा कभी अपनी आलोचना का मुख्य आधार बनाया करती थी।
मऊगंज की घटना: जनसेवा या 'जमीन की लालसा'?
मऊगंज में हालिया विवाद तब गहरा गया जब स्थानीय विधायक प्रदीप पटेल दो पक्षों के बीच हुए विवाद को सुलझाने के बजाय स्वयं धरने पर बैठ गए। इस घटना ने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस के पूर्व विधायक और कद्दावर नेता सुखेंद्र सिंह 'बन्ना' ने भाजपा विधायक पर तीखा हमला बोला है। एक हालिया वीडियो और सार्वजनिक बयानों के माध्यम से सुखेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि विधायक प्रदीप पटेल का ध्यान जनता की समस्याओं के समाधान पर कम और 'जमीन' पर अधिक केंद्रित है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक "येन-केन-प्रकरेण" विवादित जमीनों पर अपना प्रभाव स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं, जो एक जनप्रतिनिधि की गरिमा के विरुद्ध है।
'आयातित नेताओं' पर उठते सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा आम है कि भाजपा ने हाल के वर्षों में अन्य दलों से आए नेताओं को जिस तरह से प्रतिनिधित्व सौंपा है, उससे पार्टी की मूल विचारधारा 'दरकिनार' होती जा रही है। इंदौर से लेकर मऊगंज तक की घटनाओं में शामिल चेहरों को लेकर यह कहा जा रहा है कि "नई संस्कृति" के ये नेता दल के अनुशासन के बजाय व्यक्तिगत वर्चस्व की राजनीति को प्राथमिकता दे रहे हैं।
कांग्रेस शासन काल की याद दिलाती वर्तमान स्थिति?
विपक्ष का तर्क है कि भाजपा अब उसी ढर्रे पर चल पड़ी है जिसका वह विरोध करती थी। आए दिन होने वाले विवाद, सत्ता का धौंस और प्रशासनिक कार्यों में सीधा हस्तक्षेप—ये तमाम बातें प्रदेश की जनता को कांग्रेस के पुराने दौर की याद दिला रही हैं। जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि 'संगठन' से बड़ा 'व्यक्ति' होता जा रहा है।
गंभीर होती स्थिति
मऊगंज में जिस तरह से विधायक और पूर्व विधायक के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है, उससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो इस बात की पुष्टि करते हैं कि विवाद केवल वैचारिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत और जमीनी हितों से जुड़ा हुआ है। क्या भाजपा अपने "चाल, चरित्र और चेहरे" को बचाए रख पाएगी या आयातित नेताओं की ये नई संस्कृति पार्टी की दशकों की छवि को धूमिल कर देगी? मऊगंज की घटना केवल एक जिले का विवाद नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की बदलती राजनीति का एक ऐसा आईना है, जिसमें सत्ता और सेवा के बीच की लकीर धुंधली होती नजर आ रही है।
