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| मऊगंज में गौशाला घोटाले की बू, सत्यापन बिना लाखों का आहरण—किसके संरक्षण में डॉ. जे. एल. साकेत Aajtak24 News |
मऊगंज - जिला एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह किसी विकास कार्य की नहीं, बल्कि शासकीय गौशालाओं से जुड़े एक गंभीर घोटाले के आरोप हैं। जिला अंतर्गत संचालित कई शासकीय गौशालाओं को लेकर जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे न केवल प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करते हैं, बल्कि गौवंश संरक्षण जैसी संवेदनशील योजना की साख पर भी बड़ा सवाल खड़ा करते हैं।
आरोप है कि मऊगंज जिले में संचालित आधा दर्जन से अधिक गौशालाएं ऐसी हैं, जो गौसंवर्धन बोर्ड से सत्यापित ही नहीं हैं, इसके बावजूद उप संचालक पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जे. एल. साकेत के कार्यकाल में इन गौशालाओं के नाम पर लाखों रुपये की शासकीय राशि का आहरण किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि जिन गौशालाओं में वास्तविक रूप से सौ के आसपास भी गोवंश नहीं हैं, वहां कागजों में तीन सौ से अधिक गोवंश दर्शाकर प्रति माह तीन से चार लाख रुपये तक का भुगतान किया जा रहा है। यदि ये आरोप सही हैं, तो यह सीधे-सीधे सरकारी धन की लूट और व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस पूरे मामले की लिखित शिकायत लगभग एक माह पूर्व जिला कलेक्टर कार्यालय में की जा चुकी है। जिला कलेक्टर द्वारा कुछ गौशालाओं का निरीक्षण किए जाने की बात भी सामने आई, इसके बावजूद जांच फाइलों में अटकी हुई है और कथित रूप से फर्जी भुगतान की प्रक्रिया बदस्तूर जारी है। यह स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
इतना ही नहीं, आरोप यह भी हैं कि गौशाला संचालकों पर एक विशेष भूसा व्यापारी से ही भूसा खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। इससे न केवल प्रतिस्पर्धा समाप्त होती है, बल्कि कमीशनखोरी की आशंका भी गहराती है। अमर रिपब्लिक न्यूज के पास कमीशनखोरी से जुड़ा एक कथित ऑडियो उपलब्ध हुआ है! उक्त आडियो में गौशाला संचालन कर्ता के वार्तालाप में यह सिद्ध हो रहा है की उपसंचालक डॉ जे एल साकेत के द्वारा एक निश्चित भूसा व्यवसाई से भूसा खरीदी करने का दबाव बनाने की बात स्पष्ट हो रही है! उक्त आडियो को बहुत जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा! यह पूरा प्रकरण एक संवेदनशील सवाल खड़ा करता है—आखिर ऐसे अधिकारी को किसका संरक्षण प्राप्त है? यदि शिकायतें, निरीक्षण और मीडिया में उठ रही आवाजें भी कार्रवाई के लिए पर्याप्त नहीं हैं, तो क्या मऊगंज जिला प्रशासन एक बार फिर किसी बड़े धरना-प्रदर्शन या प्रदेश स्तर की मीडिया सुर्खियों का इंतजार कर रहा है।
मऊगंज जिले का हालिया इतिहास गवाह रहा है कि कई मामलों में तब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जब तक मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय नहीं बना। क्या इस बार भी गौवंश संरक्षण जैसे पवित्र उद्देश्य से जुड़ा मामला उसी राह पर छोड़ा जाएगा? जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराए, दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करे और गौशालाओं की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे। गौवंश के नाम पर होने वाले किसी भी कथित भ्रष्टाचार को बर्दाश्त करना न केवल कानून के साथ अन्याय है, बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों के भी खिलाफ है। अब देखना यह है कि प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाता है या मऊगंज एक बार फिर “हंगामे के बाद कार्रवाई” की परंपरा को दोहराता है।
