| 4 दशक से 'लापता' है धिरौल का रमेश शर्मा: पंचायत ने जारी किया प्रमाण-पत्र, अनसुलझी रही 40 साल पुरानी मिस्ट्री Aajtak24 News |
अनूपपुर - जिले के जैतहरी जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत धिरौल से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने क्षेत्र में पुरानी यादों और कानूनी चर्चाओं को फिर से जीवित कर दिया है। यहाँ के निवासी रमेश शर्मा पिछले 40 वर्षों से रहस्यमय तरीके से लापता हैं। अब, लगभग चार दशक बीत जाने के बाद, ग्राम पंचायत ने उनके लापता होने का आधिकारिक प्रमाण-पत्र जारी कर उनके परिवार की लंबी प्रतीक्षा पर एक वैधानिक मुहर लगा दी है।
मार्च 1986: वह दिन जब थम गई वक्त की सुई
रिकॉर्ड के अनुसार, धिरौल के पुश्तैनी निवासी रमेश शर्मा (पिता: स्वर्गीय लक्ष्मण शर्मा) मार्च 1986 में अचानक गाँव से कहीं चले गए थे। उस समय उनके लापता होने की खबर ने पूरे गाँव को स्तब्ध कर दिया था। परिजनों ने अपने स्तर पर हर संभव प्रयास किए, लेकिन रमेश का कोई पता नहीं चला। दिन हफ्तों में, हफ्ते महीनों में और महीने दशकों में बदल गए, लेकिन न तो रमेश लौटे और न ही उनकी कोई सूचना मिली।
पंचायत ने आधिकारिक रूप से माना 'लापता'
हाल ही में ग्राम पंचायत धिरौल द्वारा जारी प्रमाण-पत्र इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ है। सरपंच के हस्ताक्षर और पदमुद्रा युक्त इस पत्र में स्पष्ट किया गया है कि रमेश शर्मा पिछले 40 वर्षों से लापता हैं। पंचायत ने पुष्टि की है कि आज दिनांक तक उनके जीवित होने या मृत होने के संबंध में कोई भी पुख्ता जानकारी या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। न तो शासन-प्रशासन के पास और न ही स्थानीय लोगों के पास उनके ठिकाने का कोई सुराग है।
कानूनी निहितार्थ और 'मृत्यु की उपधारणा'
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत द्वारा जारी यह प्रमाण-पत्र परिवार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 108 के तहत, यदि कोई व्यक्ति 7 वर्षों तक लापता रहता है, तो उसे कानूनी तौर पर 'मृत' माना जा सकता है। रमेश शर्मा के मामले में यह अवधि 40 वर्ष हो चुकी है। अब इस प्रमाण-पत्र के आधार पर परिवार:
पैतृक संपत्ति का नामांतरण करवा सकेगा।
बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों से जुड़े लंबित कार्यों को निपटा सकेगा।
भविष्य में 'मृत्यु प्रमाण-पत्र' के लिए न्यायालय में आवेदन कर सकेगा।
एक परिवार की अधूरी तलाश
यह केवल एक कागजी कार्रवाई नहीं है, बल्कि एक परिवार के उस संघर्ष की कहानी है जिसने 40 साल तक अपनों की राह देखी। धिरौल के ग्रामीणों के बीच भी यह चर्चा का विषय है कि आखिर 1986 की उस शाम ऐसा क्या हुआ था कि रमेश शर्मा का आज तक कोई सुराग नहीं मिल पाया। फिलहाल, पंचायत के इस कदम ने प्रशासनिक स्तर पर रमेश शर्मा को 'लापता' की श्रेणी में आधिकारिक रूप से दर्ज कर दिया है।