मऊगंज-रीवा में धान खरीदी की व्यवस्था ध्वस्त, किसानों का अरबों रुपया फंसा, 'सेवा शुल्क' के खेल में सरकार को करोड़ों की चपत Aajtak24 News

 मऊगंज-रीवा में धान खरीदी की व्यवस्था ध्वस्त, किसानों का अरबों रुपया फंसा, 'सेवा शुल्क' के खेल में सरकार को करोड़ों की चपत Aajtak24 News

मऊगंज - विंध्य क्षेत्र के मऊगंज और रीवा जिले में धान खरीदी सीजन 2025-26 भ्रष्टाचार और अव्यवस्था की भेंट चढ़ गया है। सरकार के दावों के विपरीत, धरातल पर किसान खून के आंसू रो रहा है। हालत यह है कि दिसंबर की शुरुआत में बेची गई धान का भुगतान जनवरी मध्य तक किसानों के खातों में नहीं पहुंचा है। कड़ाके की ठंड में किसान अपने बच्चों की स्कूल फीस, गर्म कपड़े और अगली बुवाई के लिए लिए गए कर्ज को चुकाने के लिए दर-दर भटक रहा है।

भंडारण का अभाव या भ्रष्टाचार का बहाना?

मऊगंज जिले में स्थिति सबसे भयावह है। यहाँ धान का उठाव न होने के कारण खरीदी केंद्रों पर बोरियां खुले आसमान के नीचे धूप में सूख रही हैं, जिससे धान का वजन लगातार घट रहा है। जब अधिकारियों से इस संबंध में बात की गई, तो उन्होंने 'गोदाम फुल' होने का रटा-रटाया जवाब दिया। लेकिन हकीकत कुछ और ही है। सूत्रों के अनुसार, गोदामों में भंडारण के नाम पर 'सेवा शुल्क' का काला खेल चल रहा है।

खुलासा: यदि प्रति ट्रक 1,000 से 2,000 रुपये का 'सुविधा शुल्क' न दिया जाए, तो माल रिजेक्ट कर दिया जाता है। वहीं, अगर 2,000 से 3,000 रुपये चुका दिए जाएं, तो 'बदरा' (खराब धान) युक्त 25 किलो की बोरियां भी बेरोकटोक जमा कर ली जाती हैं। यह सीधा-सीधा सरकारी राजस्व की लूट है।

बिचौलियों की चांदी, कागजों पर फर्जी 'गिरदावली'

मऊगंज के पहाड़ी क्षेत्रों में एक और बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहाँ जमीन की गिरदावली (रकबा) में भारी हेरफेर की गई है। जितने रकबे में धान बोई ही नहीं गई, उससे कहीं ज्यादा का टोकन काटकर धान की फर्जी बिक्री दिखा दी गई है। बिचौलियों ने किसानों से 100-200 रुपये कम में धान खरीदकर सरकारी केंद्रों पर खपा दी है, और अब भुगतान न होने से वे भी परेशान हैं।

सीबीआई जांच की उठ रही मांग

हैरानी की बात यह है कि परिवहन के दौरान ट्रक चालकों द्वारा भी प्रति ट्रक 2 से 6 क्विंटल धान चोरी करने की शिकायतें आ रही हैं। सवाल यह है कि जब गोदाम पर धान रिजेक्ट होती है, तो बाद में वह पास कैसे हो जाती है और मात्रा की पूर्ति कैसे दिखाई जाती है? इस पूरे मामले में करोड़ों रुपयों के घोटाले की बू आ रही है। स्थानीय लोगों और किसान संगठनों का कहना है कि यदि केंद्र सरकार या CBI इस मामले की निष्पक्ष जांच करे, तो रीवा और मऊगंज में पिछले कई वर्षों से चला आ रहा अरबों का धान घोटाला उजागर हो सकता है।

आंकड़ों की बाजीगरी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मऊगंज जिले में 10 जनवरी 2026 तक लगभग 13 लाख क्विंटल धान की खरीदी की गई है, जबकि परिवहन केवल 8 लाख क्विंटल का ही हुआ है। शेष 5 लाख क्विंटल धान केंद्रों पर सड़ रही है। प्रशासन की इस चुप्पी ने किसानों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।



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