मऊगंज में 'सिस्टम' का सरेंडर: दिव्यांग पत्रकार को मौत की धमकी, खाकी की खामोशी क्या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार है? Aajtak24 News

मऊगंज में 'सिस्टम' का सरेंडर: दिव्यांग पत्रकार को मौत की धमकी, खाकी की खामोशी क्या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार है? Aajtak24 News 

मऊगंज  - मध्य प्रदेश के नवागत जिले मऊगंज से एक ऐसी खबर निकलकर सामने आ रही है, जिसने सुशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है। यहाँ एक निर्भीक और कलम के सिपाही दीपक गुप्ता को सरेआम मौत के घाट उतारने की धमकी दी जा रही है। विडंबना देखिए कि जिस पत्रकार की कलम ने हमेशा जनता की आवाज बुलंद की, आज वही अपनी सुरक्षा के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है।

गालियाँ, धमकी और दिव्यांगता का क्रूर उपहास

बीते दिनों पत्रकार दीपक गुप्ता के फोन पर मोबाइल नंबर 7462065289 से एक कॉल आता है। कॉल उठाने पर सामने वाला व्यक्ति शिष्टाचार की सारी सीमाएं लांघ देता है। वह न केवल दीपक को भद्दी और अश्लील गालियाँ देता है, बल्कि उनकी दिव्यांगता का भी मजाक उड़ाता है। यह सिर्फ एक व्यक्ति को दी गई गाली नहीं है, बल्कि यह उस हर व्यक्ति के स्वाभिमान पर चोट है जो अपनी शारीरिक सीमाओं के बावजूद समाज को आईना दिखाने का साहस करता है। धमकी देने वाले के हौसले इतने बुलंद हैं कि उसे न तो कानून का खौफ है और न ही पुलिस की वर्दी का। वह फोन पर चीख-चीख कर दीपक को 'खत्म' करने की बात कहता है।

मऊगंज पुलिस: रक्षक या महज तमाशबीन?

सवाल यह उठता है कि मऊगंज की खाकी इतनी बेबस क्यों है? दीपक गुप्ता पर यह कोई पहला हमला नहीं है। इससे पहले भी उन पर जानलेवा हमले हो चुके हैं, शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, लेकिन पुलिस की फाइलों पर धूल जमती रही और अपराधी खुलेआम घूमते रहे।

पुलिस अधीक्षक (SP) दिलीप सोनी की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:

  1. जब एक पत्रकार पर बार-बार हमले हो रहे हैं, तो उसे सुरक्षा क्यों नहीं दी गई?

  2. धमकी देने वाले नंबर को ट्रेस कर अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?

  3. क्या पुलिस प्रशासन किसी 'बड़ी वारदात' के होने का इंतजार कर रहा है?

गुंडा राज बनाम सुशासन की जंग

मऊगंज के पत्रकार संगठनों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। पत्रकारों का कहना है कि अगर सच बोलने की कीमत जान देकर चुकानी पड़ेगी, तो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ ढह जाएगा। एक दिव्यांग पत्रकार को इस तरह मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना यह दर्शाता है कि इलाके में अपराधियों का खौफ प्रशासन के इकबाल से बड़ा हो चुका है।

मुख्यमंत्री की दहलीज तक पहुंचेगी बात

यह मामला अब सिर्फ जिला स्तर तक सीमित नहीं रहेगा। पत्रकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 24 घंटों के भीतर अपराधी को जेल की सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो वे सड़कों पर उतरेंगे। इस मामले की गूँज भोपाल में मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) तक पहुँचाने की तैयारी है।  दीपक गुप्ता की सुरक्षा केवल एक व्यक्ति की सुरक्षा नहीं है, बल्कि यह पत्रकारिता की आजादी और एक दिव्यांग नागरिक के अधिकारों की रक्षा का सवाल है। मऊगंज पुलिस को यह साबित करना होगा कि वह अपराधियों के साथ नहीं, बल्कि न्याय के साथ खड़ी है।

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