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| रामराज या भ्रष्टराज,स्कूल शिक्षा विभाग में अनुरक्षण मद की राशि में 28 लाख के घोटाले का मामला पहुंचा कमिश्नर के पास Aajtak24 News |
रीवा - घोटालों के लिए चर्चित रीवा जिले के शिक्षा विभाग में अनुदान और अनुकम्पा के बाद अनुरक्षण मद में 28 लाख के घोटाले की बात सामने आई है।जिसके बाद जिले के शिक्षा विभाग में भूचाल आ गया है।मामला अब कमिश्नर रीवा के पास पहुंच गया है।शिकायत कर्ता ने कार्यवाही न किए जाने पर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने की बात कही है।कहा जा रहा है कि यदि विस्तृत जांच हुई तो कई अधिकारी सलाखों के पीछे होंगे। गौरतलब है कि स्कूल शिक्षा विभाग में अनुरक्षण मद की राशि में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने रीवा जिले के एक सौ चालीस से अधिक स्कूलों के लिए पचास लाख रुपए की राशि आवंटित की थी। जिससे आवश्यकतानुसार विभिन्न विद्यालयों की मांग पर ज्यादा से ज्यादा विद्यालयों को राशि आवंटित की जानी थी।जिससे पोता ई एवं मरम्मत के कार्य कराए जाने थे।लेकिन रीवा में जिला शिक्षा अधिकारी रामराज मिश्र ने मात्र छह विद्यालयों के लिए ठेकेदार को अट्ठाइस लाख से ज्यादा की राशि का भुगतान कर दिया।आश्चर्य की बात तो यह है कि जिन विद्यालयों के कार्य के लिए ठेकेदार को भुगतान किया गया उन विद्यालयों के प्राचार्यों ने साफ साफ कह दिया है कि न तो उनके यहां किसी ठेकेदार द्वारा कार्य ही कराया गया है,न ही उनके द्वारा किसी कार्य का सत्यापन ही हुआ है।जिससे साफ पता चलता है कि बिना कार्य किए ठेकेदार को अट्ठाइस लाख से अधिक की राशि का भुगतान कर दिया गया और उक्त राशि में बंदर बांट की गई।इसमें डी ई ओ के अलावा ए डी पी सी नवीन श्रीवास्तव और ए पी सी सुधाकर तिवारी की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता है।
इन विद्यालयों को दी गई राशि
जिन विद्यालयों के कार्य के लिए ठेकेदार को भुगतान किया गया है उसमें हायर सेकेंडरी पैपखरा, हाई स्कूल दुआरी,पी एम श्री गूढ़,हाई स्कूल बढईया,कन्या खटखरी शामिल हैं। बढ़इया एवं खटखटी के प्राचार्य ने साफ कर दिया है कि उनके विद्यालय में इस सत्र में अनुरक्षण मद में कोई कार्य नहीं कराया गया है न ही उनके द्वारा कोई सत्यापन किया गया है।वही पाई प्राचार्य ने स्पष्ट रूप से बताया है कि उनके यहां पुताई के अलावा कोई कार्य नहीं हुआ है,न ही उन्होंने भुगतान हेतु कोई सत्यापन किया है।वही गुढ़ प्राचार्य विनय मिश्र ने तो स्पष्ट रूप से ठेकेदार के खिलाफ कार्य पूर्ण न करने पर भुगतान रोकने एवं एफ आई आर कराने के लिए डी ई ओ को पत्र भी लिखा था।इसके बावजूद भुगतान कर राशि की बंदरबांट कर ली गई।
सतना में ठेकेदार के खिलाफ हो चुकी है एफ आई आर
सतना में इसी तरह के मामले में इसी ठेकेदार सत्यव्रत तिवारी के खिलाफ कलेक्टर ने एफ आई आर दर्ज कराई है।अब रीवा और मऊगंज कलेक्टर की कार्यवाही का इंतजार है।हालांकि रीवा में ठेकेदार के साथ डी ई ओ, ए डी पी सी एवं ए पी सी की मिलीभगत स्पष्ट हो रही है।
ए डी पी सी नवीन श्रीवास्तव को अभी तक नहीं किया गया मुक्त
इतने बड़े घोटाले के उजागर होने तथा शासन द्वारा ए डी पी सी के पद पर आकांक्षा सोनी को पदस्थ किए जाने के बावजूद अभी तक नवीन श्रीवास्तव को उनकी मूल संस्था के लिए मुक्त नहीं किया गया है।जिससे साबित होता है कि नवीन श्रीवास्तव , डी ई ओ और ठेकेदार के बीच सौदा तय करने की कड़ी थे। कुल मिलाकर रामराज में विभाग ने भ्रष्टाचार की एक और इबारत लिख दी।जिसके सूत्रधार ए डी पी सी नवीन श्रीवास्तव और ए पी सी सुधाकर तिवारी ही थे।लेकिन किसी को इसकी उम्मीद नहीं रही होगी कि यह मामला कभी खुल सकता है।अब इस मामले के उजागर होते ही विभाग में रीवा से भोपाल तक हड़कंप मच गया है।जिसके बाद डी ई ओ सहित ए डी पी सी एवं ए पी सी के खिलाफ प्रशासन एफ आई आर दर्ज करा सकता है।
