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| बरहटा की अनूठी होली: आधुनिक युग में भी जीवंत है 'घर-घर' जाकर गले मिलने की परंपरा Aajtak24 News |
मऊगंज/बरहटा - जहाँ आज के दौर में त्योहार केवल सोशल मीडिया और दिखावे तक सिमटते जा रहे हैं, वहीं जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बरहटा ने अपनी पुरानी गौरवशाली परंपराओं को जीवित रखकर पूरे क्षेत्र के लिए एक मिसाल पेश की है। यहाँ आज भी होली का पर्व किसी एक घर या परिवार का नहीं, बल्कि पूरे गांव का सामूहिक उत्सव होता है।
कुलदेवी के दरबार से आगाज परंपरा के अनुसार, होली के पावन अवसर पर गांव के सभी वर्ग और समुदाय के लोग सबसे पहले अपनी कुलदेवी मां फूलमती के दरबार में एकत्रित हुए। यहाँ सामूहिक फाग गायन के साथ अबीर-गुलाल उड़ाकर उत्सव का शुभारंभ किया गया। देवी मां के चरणों में शीश नवाने के बाद पूरी टोली गांव के भ्रमण पर निकली।
डोर-टू-डोर होली मिलन बरहटा की सबसे खास बात यह रही कि सैकड़ों लोगों की यह टोली गांव के एक-एक घर पहुँची। 'डोर-टू-डोर' जाकर लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाया, बड़ों का आशीर्वाद लिया और गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। गांव के वरिष्ठ नागरिक राम सहाय मिश्रा ने भावुक होते हुए कहा कि पूर्वजों द्वारा शुरू की गई यह परंपरा आज भी जीवंत है। उन्होंने खुशी जाहिर की कि नई पीढ़ी भी इस एकता की विरासत को बखूबी आगे बढ़ा रही है।
राघव कुटीर में समापन और फाग गायन उत्सव के दूसरे दिन दोपहर को यह भव्य टोली 'राघव कुटीर' पहुँची, जहाँ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ। यहाँ ददू ताम्रकार द्वारा पारंपरिक फाग गीतों की प्रस्तुति दी गई, जिस पर ग्रामीण झूम उठे। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों के लिए जलपान की व्यवस्था की गई। समाजसेवी संतोष कुमार मिश्र ने इस एकता और सौहार्द के लिए सभी ग्रामवासियों का आभार व्यक्त किया।
राजनीति और मनमुटाव से परे ग्रामीणों का कहना है कि बरहटा की होली में कभी भी राजनीति या आपसी मनमुटाव आड़े नहीं आता। यहाँ की एकता का उदाहरण आसपास के गांवों में भी दिया जाता है।
टोली में ये रहे प्रमुख रूप से शामिल: इस गौरवशाली परंपरा में बुद्ध सेन पटेल, संतोष कुमार मिश्र, संजय कुमार मिश्र, अवधेश चतुर्वेदी, मनोज चतुर्वेदी, आशुतोष चतुर्वेदी, सतीश शुक्ला, ज्ञानेंद्र सिंह, इंद्र बहादुर सिंह, राम सजीवन पटेल, शंभू पटेल सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामवासी और युवा शामिल रहे।

