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| हिंसा और दुर्घटनाओं में अनाथ हुए 150 बच्चों को सहारा देगी सरकार, मिलेगी मासिक आर्थिक मदद Aajtak24 News |
रीवा - मासूम बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़े रखने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक बड़ी पहल की है। राष्ट्रीय बाल कोष के माध्यम से संचालित 'प्रोजेक्ट असिस्ट' योजना के तहत जिले के ऐसे 150 बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी, जिन्होंने किसी आतंकवादी घटना, साम्प्रदायिक हिंसा या अन्य गंभीर हिंसक दुर्घटनाओं में अपने माता-पिता को खो दिया है।
शिक्षा और भविष्य के लिए वित्तीय सुरक्षा
जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग ने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह सहायता केवल तात्कालिक मदद नहीं है, बल्कि बच्चों के आत्मनिर्भर बनने तक जारी रहेगी। इस योजना के तहत अनाथ हुए बच्चों को 25 वर्ष की आयु पूरी होने तक या उनकी शिक्षा पूर्ण होने तक प्रतिमाह वित्तीय मदद दी जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक तंगी के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई बीच में न छूटे।
कोर्स के आधार पर तय की गई सहायता राशि
सरकार ने छात्रों की पढ़ाई के स्तर के अनुसार सहायता राशि को विभिन्न श्रेणियों में बांटा है:
स्कूली शिक्षा व डिप्लोमा: यदि पीड़ित बच्चा 12वीं कक्षा या आईटीआई (ITI) जैसे डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लेता है, तो उसे 1250 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे।
उच्च शिक्षा (ग्रेजुएशन): स्नातक (UG) या स्नातकोत्तर (PG) स्तर की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को 1500 रुपये प्रति माह की सहायता मिलेगी।
प्रोफेशनल कोर्स: मेडिकल, इंजीनियरिंग या अन्य किसी व्यावसायिक (Professional) कोर्स की पढ़ाई करने वाले छात्रों को 1750 रुपये प्रति माह प्रदान किए जाएंगे।
कैसे करें आवेदन?
योजना का लाभ लेने के लिए पात्र बच्चों के अभिभावक या स्वयं छात्र कलेक्ट्रेट स्थित जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। आवेदन के साथ दुर्घटना से संबंधित आवश्यक दस्तावेज और शैक्षणिक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
सामाजिक पुनर्वास की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि 'प्रोजेक्ट असिस्ट' जैसी योजनाएं उन बच्चों के लिए वरदान साबित होंगी जो हिंसा की विभीषिका के कारण बेसहारा हो गए हैं। रीवा प्रशासन का लक्ष्य इन 150 चिन्हित बच्चों तक जल्द से जल्द लाभ पहुँचाना है ताकि वे एक सम्मानजनक जीवन जी सकें।
