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| काग़ज़ पर शासन, ज़मीन पर अवहेलना, स्वास्थ्य विभाग में आदेशों की विश्वसनीयता पर उठते प्रश्न Aajtak24 News |
रीवा - जब किसी शासकीय विभाग में आदेश केवल फ़ाइलों की शोभा बनकर रह जाएँ और उनका पालन उपस्थिति रजिस्टर की स्याही के सामने निष्प्रभावी हो जाए, तब यह स्थिति केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि व्यवस्था के नैतिक पतन का उद्घोष बन जाती है। रीवा स्वास्थ्य विभाग में सामने आया प्रकरण अब एक व्यक्ति या एक पद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह उस तंत्र की तस्वीर पेश करता है, जहाँ आदेश जारी तो होते हैं, पर उनका सम्मान वैकल्पिक मान लिया जाता है।तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा स्पष्ट शब्दों में जारी आदेश- जिसका उद्देश्य औषधि भंडारण, वितरण और निगरानी जैसी संवेदनशील व्यवस्था को सुचारु बनाना था- यदि हफ्तों बाद भी व्यवहार में लागू न हो, तो यह सवाल स्वाभाविक है कि शासन का अनुशासन आख़िर किस स्तर पर ठहर गया है। प्रभार से विधिवत मुक्त किए गए कर्मचारी का आज भी उसी कार्यालय के उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर करना, जहाँ से उसे हटाया जा चुका है, केवल तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि आदेशों के प्रति संगठित उदासीनता का संकेत है।
स्वास्थ्य विभाग वह धुरी है, जिस पर आम नागरिक का जीवन और भरोसा टिका होता है। यहाँ औषधि प्रबंधन में एक दिन की भी लापरवाही दवा की कमी, उपचार में विलंब और अंततः जनजीवन पर प्रतिकूल प्रभाव का कारण बन सकती है। इसके बावजूद यदि आदेशों की अवहेलना को मौन सहमति मिलती रहे, तो यह मान लेना कठिन नहीं कि कहीं न कहीं व्यवस्था के भीतर संरक्षण की अदृश्य परत सक्रिय है।
यह प्रकरण यह भी उजागर करता है कि प्रशासनिक आदेशों की जवाबदेही केवल हस्ताक्षर तक सीमित रह गई है। यदि आदेश के पालन की निगरानी नहीं होगी, तो वह आदेश नहीं, मात्र काग़ज़ी औपचारिकता बनकर रह जाएगा। उपस्थिति रजिस्टर, जिसे अनुशासन का जीवंत दस्तावेज़ माना जाता है, यदि वही अवहेलना का माध्यम बन जाए, तो यह शासकीय अभिलेखों की पवित्रता पर सीधा आघात है।
अब आवश्यकता है कि इस पूरे मामले को सामान्य प्रशासनिक असावधानी मानकर टालने के बजाय, इसे एक गंभीर अनियमितता के रूप में देखा जाए। उच्चस्तरीय जांच, स्पष्ट जवाबदेही और ठोस दंडात्मक कार्रवाई ही यह संदेश दे सकती है कि शासन के आदेश केवल फ़ाइलों में नहीं, बल्कि ज़मीन पर भी प्रभावी हैं। अन्यथा, यह प्रवृत्ति एक परंपरा का रूप ले लेगी- जहाँ आदेश काग़ज़ों में दम तोड़ते रहेंगे और रजिस्टर व्यवस्था की विडंबना का मूक साक्षी बना रहेगा।
स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता और प्रशासनिक अनुशासन की पुनर्स्थापना के लिए अब निर्णय की नहीं, बल्कि निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता है। क्योंकि जहाँ आदेशों का सम्मान नहीं होता, वहाँ व्यवस्था भी धीरे-धीरे अपना नैतिक आधार खो बैठती है।
