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| रीवा में नई उम्मीदों का सवेरा: 110 दिव्यांगों को मिले निःशुल्क कृत्रिम हाथ, अब 'इलेक्ट्रिक' ताकत से संवरेंगे काम-काज Aajtak24 News |
रीवा - कटे हुए हाथ अब किसी की प्रगति में बाधा नहीं बनेंगे। रीवा संभाग के दिव्यांगों के लिए कुशाभाऊ ठाकरे जिला चिकित्सालय में आयोजित दो दिवसीय विशेष शिविर खुशियों की सौगात लेकर आया। मध्य प्रदेश शासन (NHM) और इनाली फाउंडेशन के आपसी समन्वय से आयोजित इस शिविर में 110 ऐसे हितग्राहियों को आधुनिक निःशुल्क इलेक्ट्रिक कृत्रिम हाथ लगाए गए, जिनके हाथ कोहनी के नीचे से कटे हुए थे। अब ये सभी हितग्राही सामान्य व्यक्तियों की तरह अपने दैनिक जीवन के कार्य कर सकेंगे।
लक्ष्य से अधिक सफलता: टीम हेल्थ रीवा ने रचा इतिहास
शिविर प्रभारी श्री वीपी सिंह (जिला शीघ्र हस्तक्षेप प्रबंधक) ने जानकारी दी कि राज्य स्तर से इस शिविर के लिए 100 हितग्राहियों का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन रीवा की स्वास्थ्य टीम के अथक प्रयासों, आशा कार्यकर्ताओं के घर-घर सर्वे और RBSK टीम की सक्रियता से कुल 132 हितग्राही शिविर में पहुँचे। परीक्षण के बाद 110 हितग्राहियों को कृत्रिम हाथ लगाने हेतु फिट पाया गया।
लाभान्वित हितग्राहियों का विवरण:
रीवा जिला: 71 हितग्राही
सिंगरौली जिला: 20 हितग्राही
सीधी जिला: 14 हितग्राही
सतना जिला: 04 हितग्राही
शहडोल जिला: 01 हितग्राही
तकनीकी कौशल और नई तकनीक का समावेश
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. यत्नेश त्रिपाठी ने बताया कि इनाली फाउंडेशन की तकनीकी टीम (अभिषेक खेन्गरे, शनि सिलवंता व अन्य) ने इन इलेक्ट्रिक हाथों को फिट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ये हाथ अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित हैं, जिससे ग्राही वस्तुओं को पकड़ने और सामान्य कार्य करने में सक्षम होंगे। शिविर का निरीक्षण करने भोपाल से आईं डॉ. निधि शर्मा (उप संचालक RBSK) और डॉ. सुभाष पांडेय (स्टेट कंसल्टेंट) ने रीवा टीम के शानदार प्रदर्शन की सराहना की।
इनके प्रयासों से सफल हुआ शिविर
इस वृहद आयोजन को सफल बनाने में जमीनी स्तर से लेकर प्रशासनिक स्तर तक के अधिकारियों का योगदान रहा:
मार्गदर्शन एवं निगरानी: राज्य सलाहकार श्री शैलेश शर्मा के निर्देशन में ब्लॉक कम्युनिटी मोबिलाइजर्स और आशा कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर केस चिह्नित किए। डीपीएम श्री राघवेंद्र मिश्रा की निगरानी में समस्त व्यवस्थाएं संचालित हुईं।
चिकित्सीय सहयोग: हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. भागवत प्रसाद यादव ने केसेज की पहचान की। शिविर में सिविल सर्जन डॉ. प्रतिभा मिश्रा सहित दर्जनों विशेषज्ञ चिकित्सकों और एएमओ (AMO) की टीम सक्रिय रही।
पंजीयन एवं व्यवस्था: पंजीयन कार्य एएनएम (ANM) श्रीमती प्रतिमा शुक्ला, अलका मिश्रा व अर्चना साकेत ने किया। ब्लॉक स्तर से विशेष वाहनों के माध्यम से हितग्राहियों को सम्मानपूर्वक शिविर स्थल तक लाया गया।
भावनाओं का ज्वार: एक नई आशा के साथ लौटे घर
शिविर के समापन पर हितग्राहियों के चेहरों पर एक अलग ही चमक थी। कई वर्षों से दूसरे पर निर्भर रहने वाले व्यक्तियों ने जब कृत्रिम हाथ से पहली बार गतिविधि की, तो उनकी आँखें भर आईं। हितग्राहियों ने प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग का आभार जताते हुए कहा कि यह उनके लिए किसी पुनर्जन्म से कम नहीं है।

