किसानों की बदहाली और दबंगों की मनमानी
एक ओर जहाँ किसान अपनी खेती और परिवार के काम छोड़कर, भूख-प्यास की परवाह किए बिना घंटों लाइन में खड़े होकर बस दो-चार बोरी खाद पाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दबंगों द्वारा इस खाद की खुलेआम कालाबाजारी की जा रही है। इसका सीधा नतीजा यह है कि जरूरतमंद किसान खाली हाथ लौट रहे हैं, जबकि कालाबाजारी करने वालों के गोदामों में खाद का अंबार लगा हुआ है।
प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल
इस घटना ने कई बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
किसानों के हिस्से की खाद इन कालाबाजारी करने वालों तक आखिर पहुँच कैसे रही है?
क्या इस बड़े खेल में प्रभावशाली नेताओं और अधिकारियों के करीबी लोग शामिल हैं?
प्रशासन की मौजूदगी के बावजूद इतना बड़ा खेल कैसे संभव हो रहा है?
किसानों का साफ कहना है कि यह केवल अवैध बिक्री नहीं, बल्कि उनकी मेहनत, फसल और भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उनकी साफ मांग है कि प्रशासन तत्काल ऐसे ठिकानों पर छापामार कार्रवाई करे और इस गोरखधंधे में शामिल सभी दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।
रीवा समेत पूरे विंध्य अंचल में खाद संकट अब किसानों की सबसे बड़ी समस्या बन चुका है। इस समय हर निगाह प्रशासन पर टिकी है कि क्या इस बार कालाबाजारी करने वालों पर वाकई गाज गिरेगी या यह भी एक अन्य मामला बनकर कागजों तक ही सीमित रह जाएगा। सवाल बड़ा है और जवाब का इंतजार है।