रीवा के क्योटी जलप्रपात में बड़ा हादसा: मां-बेटी की जलसमाधि, सुरक्षा इंतज़ामों पर उठे गंभीर सवाल Aajtak24 News


रीवा के क्योटी जलप्रपात में बड़ा हादसा: मां-बेटी की जलसमाधि, सुरक्षा इंतज़ामों पर उठे गंभीर सवाल Aajtak24 News

रीवा/मध्य प्रदेश - रीवा जिले का प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर क्योटी जलप्रपात मंगलवार को एक बार फिर एक दुखद और भयावह हादसे का गवाह बना। मोनी अमावस्या पर स्नान करने आईं एक मां-बेटी नदी के तेज बहाव में बहकर गहराई में समा गईं, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन की लापरवाही और इस संवेदनशील पर्यटन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था की कमी को उजागर किया है।

कैसे हुआ हादसा?

यह दुखद घटना मंगलवार 26 अगस्त 2025 की सुबह लगभग 4 बजे हुई। ग्राम पंचायत दूलहरा की रहने वाली मां-बेटी तीज त्यौहार पर मोनी अमावस्या स्नान के लिए क्योटी जलप्रपात पहुँची थीं। स्नान के दौरान अचानक मां का पैर फिसल गया और वह नदी की तेज धार में बहने लगीं। अपनी मां को डूबता देख बेटी ने उन्हें बचाने के लिए बिना सोचे-समझे पानी में छलांग लगा दी। लेकिन वह भी बहाव की चपेट में आ गई और दोनों ही कुछ ही पलों में बहकर करीब 200 फीट नीचे स्थित गहरे पानी के गड्ढे में समा गईं। हादसा इतना भयावह था कि दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की खबर मिलते ही परिवारजन और पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुँची। पुलिस ने दोनों महिलाओं की शिनाख्त की। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के बाद कुछ देर के लिए दोनों शव पानी की सतह पर दिखाई दिए थे, लेकिन जलप्रपात की गहरी खाई और अँधेरे के कारण शवों को मंगलवार को बाहर नहीं निकाला जा सका।

हादसों का सिलसिला और प्रशासन की चुप्पी

क्योटी जलप्रपात अपने मनोरम दृश्य के लिए जितना मशहूर है, उतना ही हादसों के लिए भी बदनाम होता जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में इस जलप्रपात में कई पर्यटक और स्थानीय लोग अपनी जान गँवा चुके हैं। इसके बावजूद, प्रशासन ने यहाँ सुरक्षा के कोई ठोस इंतजाम नहीं किए हैं।

जलप्रपात क्षेत्र में न तो पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात रहते हैं, न ही किसी तरह के बैरिकेड्स या स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन सिर्फ हादसे होने के बाद ही हरकत में आता है, और फिर स्थिति जस की तस हो जाती है। जब यह क्षेत्र लगातार संवेदनशील माना जाता है, तो यहाँ स्थायी रेस्क्यू टीम, गोताखोर और नियमित सुरक्षा गश्त क्यों नहीं होती?

स्थानीय लोगों ने लगातार हो रहे हादसों पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्योटी जलप्रपात पर बड़ी संख्या में पर्यटक और ग्रामीण आते हैं। ऐसे में यहाँ सुरक्षा के ठोस इंतजाम होना बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि अगर समय रहते सुरक्षा कर्मी और रेस्क्यू टीम मौके पर मौजूद होती तो शायद इन मां-बेटी की जान बचाई जा सकती थी। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन की लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब अभी भी तलाशना बाकी है।



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