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मध्य प्रदेश में पुलिस स्थानांतरण नीति पर सवाल: रीवा में कर्मचारियों में पनप रहा आक्रोश aacrosh Aajtak24 News |
रीवा/मध्य प्रदेश - मध्य प्रदेश सरकार और पुलिस मुख्यालय की निर्धारित स्थानांतरण नीतियों के विपरीत रीवा जिले में किए जा रहे तबादलों को लेकर पुलिस कर्मचारियों में भीतर ही भीतर भारी आक्रोश पनप रहा है। आरोप है कि जहां नियमानुसार एक पुलिसकर्मी का स्थानांतरण सामान्यतः तीन वर्ष बाद होता है, वहीं रीवा शहर मुख्यालय में कई कर्मचारी 15 से 20 वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं, जबकि कुछ अन्य का स्थानांतरण साल भर में कई बार किया जा रहा है। यह स्थिति पुलिस प्रशासन की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रीवा शहर के कुछ प्रमुख थानों में मासिक वसूली करोड़ों रुपये में होने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह वसूली मुख्य रूप से गिट्टी, बालू, मोरम, अवैध बसों के संचालन, दारू की पैकारी, गांजा, मेडिकल नशा, ब्राउन शुगर, सट्टा और पशु तस्करी जैसे अवैध धंधों से की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि थानों में इन सभी अवैध गतिविधियों के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित हैं, जिसमें पशु तस्करी में तो बकरी, भैंस और बैल के लिए भी अलग-अलग रेट तय हैं।
आरोप है कि यह करोड़ों की राशि किसके पास जा रही है, यह एक बड़ा प्रश्न है। रीवा जिले में आज भी कई ऐसे विवादित थाना प्रभारी पदस्थ हैं, जिन पर जुआ-सट्टा खिलवाने के गंभीर आरोप लगे हैं। बावजूद इसके, उनके विरुद्ध विभाग कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाता, क्योंकि उनकी पहुंच सफेदपोश नेताओं या वरिष्ठ अधिकारियों से बेहद निकट बताई जाती है। यही कारण है कि ऐसे 'पहुंच वाले' कर्मचारी एक ही स्थान पर कई वर्षों से जमे हुए हैं, जबकि जिनकी कोई पहुंच नहीं है, उनका स्थानांतरण एक साल में चार-चार बार तक किया जा रहा है, भले ही उनके खिलाफ कोई गंभीर आरोप न हो। यह स्थिति सरकार की मंशा के विपरीत है, जहां एक व्यक्ति को एक स्थान पर 3 से 5 वर्ष रहने का प्रावधान है।
शिकायतें यह भी बताती हैं कि रीवा जिले में करोड़ों नहीं, बल्कि अरबों रुपये की मासिक वसूली हो रही है। इस वसूली में थानों में पदस्थ डायल 100 के चालक, पुलिस के छोटे कर्मचारी और यहां तक कि हर गांव में संचालित ऑनलाइन बैंक के माध्यम से भी पैसा एकत्रित किया जा रहा है। पूर्व में रीवा और मनगवां थाना पदस्थापना के बाद थाना प्रभारी मनगवां के खिलाफ भी गंभीर शिकायतें सामने आई थीं। रीवा के थाना प्रभारी के शहर में भी काफी विवाद हुए थे। ऐसे कई अन्य कर्मचारी भी मिल जाएंगे जो कई वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हैं।
वर्तमान में रीवा जिले के शहरी क्षेत्रों में तैनात थाना प्रभारी अपनी कुर्सी बचाने और उपलब्धि हासिल करने के लिए इधर-उधर की कार्रवाई करने की कोशिश कर रहे हैं। आरोप यह भी है कि सिस्टम में खरे उतरने वाले अधिकारी कई बार गंभीर मामलों को भी कम कर देते हैं, जैसे अस्पताल में हुए गैंगरेप जैसे गंभीर मामले को छेड़खानी का रूप दे दिया गया। चोरी, लूट, कोरेक्स और शराब की पैकारी भी कथित तौर पर एक 'सिस्टम' का हिस्सा बन गई है। कुछ शिकायतें तो यह भी हैं कि चोरी करने वाले लोगों की सूची थाना प्रभारी के हमराह (सहायक) के पास रहती है, जिसका लेखा-जोखा वे करते रहते हैं। हालांकि, अब ज्यादातर थाना प्रभारी हमराहों पर भरोसा न कर निजी चालकों को वसूली का काम सौंप रहे हैं।
(दैनिक आज तक 24 इन आरोपों को सिद्ध नहीं करता है, किंतु लोगों की इस आवाज को प्रदेश के जनप्रतिनिधियों तथा उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है।) जिले में ऐसे भी कई थाना प्रभारी हैं जिन पर अपने घरों में भी जुआ खिलवाने के आरोप लग चुके हैं।