स्व सहायता समूह की महिलाएं फूलो की महक महकाने में जुटी juti Aaj Tak 24 News

 

स्व सहायता समूह की महिलाएं फूलो की महक महकाने में जुटी juti Aaj Tak 24 News

कोरिया - आगामी होली पर्व को ध्यान में रखते हुए बैकुंठपुर के बाजारों में रंग- गुलाल, पिचकारी व मिठाइयों की ओर बड़ी संख्या में लोग ख़रीददारी करने में जुटे हुए हैं। जिला क्लेक्टरेट परिसर में भी जय सेवा सहायता महिला समूह की श्रीमती कुसुम सिंह हर्बल गुलाल का स्टॉल लगाई हुई है। उन्होंने बताया कि यह गुलाल विभिन्न फूलों से तैयार की गई। इस गुलाल में किसी भी तरह की केमिकल या सेंट का उपयोग नहीं किया गया है। बल्कि इन महिला समूहों की महिलाओं द्वारा प्राकृतिक गुलाल तैयार की गई है, जिससे गुलाल लगाने वाले का तन-मन में एक सुखद अनुभूति पैदा करेगी और स्थानीय  उत्पाद को अच्छा बाजार भी मिलेगा। ग्राम पंचायत रटगा के आश्रित गाँव डोंगरीपारा निवासी श्रीमती कुसुम सिंह ने बताया कि स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा गुलाल के अलावा, आचार, पापड़, बड़ी, मिलेट्स से बने खाद्य सामग्री आदि तैयार की जाती है और सीमार्ट के माध्यम से  खरीदी-बिक्री भी की जाती है। श्रीमती कुसुम सिंह ने बताया कि उनके द्वारा तैयार उत्पाद को रायपुर व बिलासपुर जैसे शहरों में खूब मांग की जाती है। और इसी स्वसहायता समहू की वजह से उनके समहू को 60 हजार से लेकर एक लाख रुपए तक की आमदनी हो जाती है। उन्होंने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि इस बार हर्बल गुलाल का उपयोग जरूर करें ताकि स्थानीय उत्पाद को बढ़ावा मिले और शरीर के लिए आरामदायक भी हो और गुलाल की महक चारो ओर प्रेम व सदभाव बिखरे।


Women of self-help group engaged in spreading the fragrance of flowers.

Korea - Keeping in mind the upcoming Holi festival, a large number of people are busy shopping for colors, gulal, pichkari and sweets in the markets of Baikunthpur. Mrs. Kusum Singh of Jai Seva Sahayata Mahila Group has also set up a stall of Herbal Gulal in the District Collectorate premises. He told that this gulal was prepared from different flowers. No chemical or scent has been used in this gulal. Rather, natural gulal has been prepared by the women of these women's groups, which will create a pleasant feeling in the body and mind of the person applying gulal and the local product will also get a good market. Mrs. Kusum Singh, resident of Dongripara, a dependent village of Gram Panchayat Ratga, said that apart from gulal, food items made from pickles, papad, badi, millets etc. are prepared by the women of the self-help group and also bought and sold through Seamart. She goes. Mrs. Kusum Singh told that the products prepared by her are in great demand in cities like Raipur and Bilaspur. And because of this self-help group, their group earns income ranging from Rs 60 thousand to Rs 1 lakh. Appealing to the people of the district, he said that this time they must use herbal gulal so that the local product gets promoted and is also comfortable for the body and the aroma of gulal spreads love and goodwill all around.

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