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ग्राम पंचायत सचिव और सरपंच ने 18 लाख का किया गबन, दोनों गिरफ्तार; प्रशासन का सख्त एक्शन action Aajtak24 News |
दंतेवाड़ा/छत्तीसगढ़ - छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। ग्राम पंचायतें, जो ग्रामीण विकास की रीढ़ मानी जाती हैं, उन्हीं के शीर्ष पर बैठे लोगों ने सरकारी खजाने पर हाथ साफ कर दिया। यहां कुआकोंडा ब्लॉक की ग्राम पंचायत नीलावाया के तत्कालीन सचिव अनोज मंडावी और सरपंच रमेश कोर्राम पर ₹18 लाख 42 हजार 689 की सरकारी राशि गबन करने का गंभीर आरोप लगा है. यह सिर्फ पैसों का हेरफेर नहीं, बल्कि उन गरीब और वंचित ग्रामीणों के विकास पर सीधा डाका है, जिनके लिए ये फंड जारी किए गए थे। प्रशासन ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए त्वरित और कड़ा एक्शन लिया है, जिसके तहत दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, लेकिन यह घटना एक बार फिर ग्रामीण विकास परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की गंभीर कमी को उजागर करती है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला वर्ष 2022 से 2025 के बीच का है, जब ग्राम पंचायत नीलावाया में मूलभूत और निर्माण कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि सचिव अनोज कुमार मंडावी और तत्कालीन सरपंच रमेश कोर्राम ने मिलकर डीएमएफ (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड) खाते से करीब 18,42,689.00 रुपये की राशि का गबन किया। शिकायत मिलने पर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत दंतेवाड़ा ने एक तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। इस समिति की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि कई निर्माण कार्य या तो नियमानुसार नहीं किए गए थे, या फिर ऐसे कार्यों के लिए भुगतान कर दिया गया था जो जमीनी स्तर पर अस्तित्व में ही नहीं थे। उदाहरण के तौर पर, नीलावाया ग्राम पंचायत में आंगनबाड़ी भवन आज तक बना ही नहीं है, लेकिन उसकी मरम्मत के नाम पर 1 लाख 33 हजार रुपये निकाल लिए गए थे। इसके अलावा, 15वें वित्त की राशि में भी भारी गड़बड़ी पाई गई। जांच में यह भी सामने आया कि डीएमएफ खाते से राशि तो निकाली गई थी, लेकिन उसके उपयोग का कोई पुख्ता सबूत या साक्ष्य मौजूद नहीं था।
प्रशासन का सख्त रुख: गिरफ्तारी और जेल
जांच समिति की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर, अरनपुर थाना में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा-316(2)(4)(5), 318(4), 61(2), 3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। पुलिस अधीक्षक गौरव राय के निर्देश पर त्वरित विवेचना करते हुए, सोमवार को तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव अनोज कुमार मंडावी (उम्र 27 वर्ष) को ग्राम गोंगपाल से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद मंगलवार को तत्कालीन ग्राम पंचायत सरपंच रमेश कोर्राम (उम्र 50 वर्ष) को ग्राम नीलावाया से गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
अंदरूनी क्षेत्रों में भ्रष्टाचार का बोलबाला
यह घटना दंतेवाड़ा जैसे नक्सल प्रभावित जिलों के अंदरूनी क्षेत्रों में सरकारी खजाने में होने वाली सेंधमारी के लगातार उजागर होते मामलों में से एक है। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए आने वाली राशि का गबन, ऐसे क्षेत्रों के विकास में बड़ी बाधा बन रहा है। इस मामले में प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने एक कड़ा संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।