सात दिवसीय विधिक अनुसंधान, विकास पद्वति एवं तकनीक विषय पर ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन | Saat divasiy vidhik anusandhan vikas paddati evam taknik vishay pr online karyshala ka ayojan

सात दिवसीय विधिक अनुसंधान, विकास पद्वति एवं तकनीक विषय पर ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन

सात दिवसीय विधिक अनुसंधान, विकास पद्वति एवं तकनीक विषय पर ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन

इंदौर (राहुल सुखानी) - शासकीय नवीन विधि महाविद्यालय, इन्दौर में मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा गुणवत्ता सुधार परियोजन के अन्तर्गत के सात दिवसीय (दिनांक 04/02/21 से 11/02/21 तक) विधिक अनुसंधान, विकास पद्वति एवं तकनीक विषय पर ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन हो रहा है।

सात दिवसीय विधिक अनुसंधान, विकास पद्वति एवं तकनीक विषय पर ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन

शासकीय नवीन विधि महाविद्यालय, इन्दौर में मध्यप्रदेश द्वारा विधिक अनुसंधान,शिक्षण पद्वति के अन्तर्गत ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला दिनांक 05/02/2021 को प्रात:11 बजे से आरम्भ होकर दोपहर 1 बजे तक सम्पन्न हुआ।

सात दिवसीय विधिक अनुसंधान, विकास पद्वति एवं तकनीक विषय पर ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन

कार्यशाला के प्रारम्भ में प्रो.सुहैल अहमद वाणी द्वारा ऑनलाइन कार्यशाला में उपस्थित मुख्य वक्ता डॉ. विकास गॉधी (सहप्राध्यापक नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी गुजरात) का स्वागत करते हुए अतिथि परिचय का वाचन किया गया। ऑनलाइन कार्यशाला में उपस्थित मुख्य वक्ता डॉ.विकास गॉधी (Associate Prof. Law NLU, Gujarat) द्वारा अपने उद्वबोधन में Teaching Law, Reading Research & Review विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि कक्षा में गैर औपचारिक तरीके से पढाना चाहिए। प्रत्येक प्राध्यापक को 45 मिनिट के व्याख्यान के लिए कम से कम तीन घण्टे का अध्ययन घर पर अवश्य करना चाहिए। शिक्षको को Text Book, Journals एवं Case Laws का समन्वय कर पढाना चाहिए। मौलिक विषयों एवं प्रक्रियात्मक विषयों का अध्यापन का तरीका अलग-अलग होना चाहिए, इसके लिए श्री गॉधी ने सिविल प्रक्रिया संहिता एवं संविदा विधि के पढाये जाने के तरीको पर उदाहरण देकर समझाया। प्रो.गॉधी के शोध कैसे किया जाये। इस विषस पर सारगार्भित तरीके से अपना वक्तव्य दिया।

ऑनलाइन कार्यशाला के अन्त में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य डॉ.इनामुर्रहमान (प्राचार्य शासकीय नवीन विधि महाविद्यालय इन्दौर) द्वारा कहा गया कि शोधाथ्र्ाी एवं विधाथ्र्ाी को किस तरीके से शोध करना चाहिये। एक शोधाथ्री को सबसे पहले शीध्र सामाग्री को एकत्रित करना चाहिए। अपने शोध विषय से सम्बन्धित शोधाथ्र्ाी द्वारा Text Book, Journal, Article, Referred book आदि का अध्ययन करते हुए शोध विषय से सम्बन्धित उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय द्वारा निण्र्ाीत प्रमुख वाद का भी अध्ययन करना चाहिए तथा उस विषय का विधि शास्त्रीय अध्ययन भी शोधाथ्र्ाी को करना चाहिए। शोध के सैद्वात्तिक पक्ष को कैसे समाज के लिए लाभ दायक है और उसका उपयोग समाज द्वारा कैसे कया जा सकता है, इस पर भी शोधाथ्र्ाी द्वारा अपने शोध अध्ययन के दौरान ध्यान रखना चाहिए।

ऑनलाइन कार्यशाला कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक डॉ.सुरेश सिलावट (अतितिरक्त संचालक उच्च शिक्षा विभाग इन्दौर संभाग),संरक्षक डॉ. इनामुर्रहमान (प्राचार्य शासकीय नवीन विधि महाविद्यालय इन्दौर), निदेशक डॉ. निर्मल कुमार पगारिया संयोजक प्रो. नरेन्द्र देव एवं सहसंयोजक. डॉ. मोज़िज़ मिजऱ्ा बेग, संयुक्त प्रो. पवन कुमार भदौरिया, सचिव- प्रो.विपिन कुमार मिश्रा, संयुक्त सचिव, प्रो.फिरोज अहमद मीर, प्रो. सुहैल वाणी एवं आयोजन समिति के सदस्य डॉ. सुनीता असाटी, प्रो.जतिन वर्मा, प्रो.राहुल सुखानी एवं  तकनीकी टीम में श्री राजेश वर्मा एवं शम्भू मेहता द्वारा इस कार्यशाला को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया गया । कार्यक्रम के अन्त: में आभार प्रो. पवन कुमार भदौरिया द्वारा व्यक्त किया गया।

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