अयोध्यापुरम से आरम्भ छःरिपालक यात्रा संघ का ऐतिहासिक मंगल प्रवेष पालीताण तीर्थ में हुआ | Ayoshyapuram main arambh chha ripalak yatra sangh ka aetihasik mangal pravesh

अयोध्यापुरम से आरम्भ छःरिपालक यात्रा संघ का ऐतिहासिक मंगल प्रवेष पालीताण तीर्थ में हुआ

अयोध्यापुरम से आरम्भ छःरिपालक यात्रा संघ का ऐतिहासिक मंगल प्रवेष पालीताण तीर्थ में हुआ

पालीताणा - बसंत पंचमी मंगलवार को दादा गुरुदेव की पाट परम्परा के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा., मुनिराज श्री पीयूषचन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज श्री रजतचन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज श्री चन्द्रयशविजयजी म.सा., मुनिराज श्री पुष्पेन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज श्री रुपेन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज श्री जिनचन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज श्री जनकचन्द्रविजयजी म.सा. एवं साध्वी श्री किरणप्रभाश्री जी म.सा. आदि ठाणा 5 का अयोध्यापुरम से पालीताणा छःरिपालक यात्रा संघ का भव्य ऐतिहासिक मंगल प्रवेश श्री पालीताणा महातीर्थ में मंगलवार को हुआ । यात्रा संघ का आयोजन मेंगलवा (राज.) निवासी श्रीमती गेरोदेवी जेठमलजी कुन्दनमलजी बालगोता परिवार से श्री लालचंदजी, गौतमजी बालगोता मेंगलवा/मुम्बई/दिल्ली, लेहर कुन्दन ग्रुप द्वारा किया गया । आचार्यश्री व मुनिमण्डल की अगवानी आचार्य श्री नवरत्नसागरसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य आचार्य श्री विश्वरत्नसागरसूरीश्वरजी म.सा. ने अपने मुनिमण्डल के साथ की ।

अयोध्यापुरम से आरम्भ छःरिपालक यात्रा संघ का ऐतिहासिक मंगल प्रवेष पालीताण तीर्थ में हुआ

संघ का मंगल प्रवेश पालीताणा स्थित जैन गुरुकुल से हुआ । श्री आनन्दजी कल्याणजी पेढ़ी पर संघपति परिवार का बहुमान करके परिवार को ‘‘संघवी‘‘ पद से विभूषित किया गया । तत्पश्चात् श्री राजेन्द्र जैन भवन ट्रस्ट की ओर से राजेन्द्र खजांची, मेनेजर भरत भाई पारेख, महेन्द्र जैन, संतोष लोढ़ा की उपस्थिती में श्रीमती अरुणा सेठ, साधना भण्डारी, अंगुरबाला खजांची, उषा लोढ़ा, रानू चत्तर आदि ने गहुंली करके यात्री संघ का अभिवादन किया ।

संघपति परिवार सहित समस्त यात्रियों ने आचार्यद्वय व मुनिमण्डल के साथ ‘‘जय तलेटी‘‘ की वंदना की । स्नात्र महोत्सव मनाया गया व दोपहर में आचार्य श्री ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. ने श्री शत्रुंजय गिरीराज तीर्थ वंदना पूजा के महत्व पर प्रवचन दिया । रात्रि में देवेश जैन, हेमन्त वेदमुथा, ऋषभ संभव इन्दौर ने भक्ति संध्या में अपनी प्रस्तुति दी । कुमारपाल राजा बनकर संघपति परिवार ने प्रभुजी की आरती उतारी ।

बुधवार को प्रातः 5 बजे आचार्यश्री ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. व मुनिमण्डल साध्वीवृंद के सानिध्य में संघ गिरिराज पद विराजित शत्रुंजयावतार प्रभु श्री आदिनाथ दादा के दर्शन वंदन करके पूजा अर्चना करेगा व तीर्थमाला संघपति परिवार को पहनायी जावेगी ।

सोमवार को अढीदीप तीर्थ पर भव्य आगमन हुआ । आचार्यश्री ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. ने कहा कि प्रवचन श्रवण करने वाले श्रावक-श्राविका और तीर्थ यात्रा के लिये जिसने कदम उठाये हो ऐसे समूह की पूजा करने को संघ पूजा कहते है । इसीलिये श्रीसंघ को जंगम तीर्थ कहते है । यह जीता जागता जंगम तीर्थ है । इस अवसर पर मुनिराज श्री रजतचन्द्रविजयजी म.सा. ने कहा कि जो सुविधा दे वो है पैसा, जो सुविधा के साथ सुरक्षा दे वह पूण्य पर जो सुविधा सुरक्षा के साथ सदगति देवे वह परमात्मा है । परमात्मा से हमारा सम्बंध पानी में मछली जैसा होना चाहिये । प्रवचन में प्रभु प्रतिमा, गुरु प्रतिमा के वधामणे के बाद आचार्यश्री व मुनि साध्वीवृंद को अक्षत व मोतीयों से वधया गया उसके बाद में समस्त यात्रीगणों ने संघपति परिवार को अक्षत मोतीयों से वधाया ।


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