सभी विश्वविद्यालय एक-दूसरे का सहयोग कर आगे बढ़ें - उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.यादव | Sabhi vishvavidhyalay ek dusre ka sahyog ka aage bade

सभी विश्वविद्यालय एक-दूसरे का सहयोग कर आगे बढ़ें - उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.यादव

‘विश्वविद्यालयों की उपलब्धि नवीन योजनाओं और संकल्पनाओं’ पर परिसंवाद सम्पन्न

सभी विश्वविद्यालय एक-दूसरे का सहयोग कर आगे बढ़ें - उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.यादव

उज्जैन (रोशन पंकज) - विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन एवं देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इन्दौर के संयुक्त तत्वावधान में “आत्मनिर्भर विक्रम विश्वविद्यालय चुनौतियां एवं अवसर” विषय पर परिसंवाद विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के शलाका दीर्घा में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.यादव ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय एक-दूसरे का सहयोग कर आगे बढ़ें। सब एकसाथ बैठकर चर्चा कर एक-दूसरे का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि हम कोविड-19 महामारी की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, ऐसे समय में प्रयास किया जा रहा है कि एक रिफार्म कमेटी बनाई जाये, जिससे नई-नई चुनौतियों से निपटा जा सके। डॉ.यादव ने कहा कि हमारा देश कृषि प्रधान देश है। इसलिये कृषि क्षेत्र के भी कोर्सेस हों, जिससे कृषि को बढ़ावा मिले।

सभी विश्वविद्यालय एक-दूसरे का सहयोग कर आगे बढ़ें - उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.यादव

परिसंवाद में विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.अखिलेश कुमार पाण्डेय व देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.रेणु जैन ने अपने-अपने विश्वविद्यालयों की उपलब्धि, नवीन योजनाओं और संकल्पनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। इन्दौर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.रेणु जैन ने कहा कि शिक्षा के उत्थान के लिये सभी विश्वविद्यालयों को संयुक्त परिसंवाद को साझा करना चाहिये। उन्होंने कहा कि यह पहल उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.मोहन यादव के द्वारा आज हुई है। यह प्रशंसनीय है। विश्वविद्यालयों में मैनेजमेंट ठीक होना चाहिये। उन्होंने कहा अच्छे प्लेसमेंट होने पर जुनियर छात्रों को प्रेरणा मिलेगी और वे आगे बढ़ेंगे। विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलपति प्रो.अखिलेश कुमार पाण्डेय ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उज्जयिनी शुरू से ही शिक्षास्थली रही है। स्मार्ट सिटी योजना के अन्तर्गत उज्जैन में प्रोफेशनल म्युजियम बनेगा, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इसी तरह उज्जैन में टूरिज्म एवं केटरिंग कोर्स भी प्रारम्भ किया जायेगा। इसी तरह मेडिकल कॉलेज की अनुमति का प्रयास भी किया जा रहा है। महाविद्यालयीन छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने की दृष्टि से विक्रम विश्वविद्यालय प्रयास कर रहा है।

देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ.अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि जिस तरह इन्दौर शिक्षा के क्षेत्र में विकसित हो रहा है, वैसा ही विक्रम विश्वविद्यालय विकसित होना चाहिये। शिक्षा के साथ-साथ छात्रों के लिये अन्य गतिविधियां विश्वविद्यालयों में संचालित की जाना चाहिये, जिससे छात्रों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके। विश्वविद्यालयों में नवीन कोर्सेस पढ़ाना चाहिये। इन्दौर विश्वविद्यालय से विक्रम विश्वविद्यालय जो भी सहयोग लेना चाहे, वह समय-समय पर उपलब्ध कराया जायेगा। इन्दौर के प्रो.अशोक कुमार ने कहा कि वर्तमान में विश्वविद्यालयों में अनेक चुनौतियां हैं। उन चुनौतियों का हमें सामना करना चाहिये।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में स्वागत भाषण विक्रम विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ.डीके बग्गा ने दिया और उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय आत्मनिर्भर बने, इसलिये यह अनूठा प्रयास दोनों विश्वविद्यालयों के आपसी समन्वय से परिसंवाद के माध्यम से नये आयाम स्थापित करने का प्रयास किया जायेगा। सारे विश्वविद्यालय उच्चतम स्तर के आयाम पर खरे उतरेंगे। कार्यक्रम की शुरूआत कुलगान से हुई तत्पश्चात अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप-दीपन कर कार्यक्रम प्रारम्भ किया। डॉ.राजेश्वर शास्त्री मुसलगांवकर ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। 

अतिथियों का स्वागत अपर संचालक श्री आरसी जाटवा, कुलसचिव डॉ.बग्गा, डॉ.आरके अहिरवार, प्रो.कन्हैयालाल मेड़ा आदि ने शाल, श्रीफल एवं पुष्पहार से किया। इस अवसर पर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ विद्वानों ने परिसंवाद में अपने-अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिये। इन्दौर से आये विद्वानों प्रो.श्री अशोक शर्मा, श्रीमती संगीता जैन, श्री प्रतोष बंसल, डॉ.अर्चना राय, डॉ.सुरेश पाटीदार आदि ने भाग लिया। इस दौरान उज्जैन विक्रम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ.रामराजेश मिश्र, प्रो.बालकृष्ण शर्मा, प्रो.पीके वर्मा, अनेक विभागाध्यक्ष, संकायाध्यक्ष, अधिकारी, कर्मचारीगण आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन विक्रम विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो.शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने किया और अन्त में आभार बीएसडब्ल्यू डॉ.आरके अहिरवार ने प्रकट किया।

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