सफेद हांथी साबित हो रहे स्टाप डेम, बंद नहीं हुए गेट | Safed hathi sabit ho rhe stop dam

सफेद हांथी साबित हो रहे स्टाप डेम, बंद नहीं हुए गेट

सफेद हांथी साबित हो रहे स्टाप डेम, बंद नहीं हुए गेट

डिंडौरी (पप्पू पड़वार) - जिला डिंडौरी के जनपद पंचायत अमरपुर में कुछ वर्ष पूर्व पानी रोको अभियान का ढिंढोरा खूब बजा लेकिन अब पानी रोकने की चिन्ता न तो जिला प्रशासन को हैं और न ही जनप्रतिनिधियों को, पानी रोको अभियान के तहत बनाए गए स्टापडेम और तलाबों के निर्माण कार्य में सम्बंधित अधिकारियों की जेबें भले ही भर गई हो और दलालों ने चांदी काटी हो पर अमरपुर ब्लाक की जनता को इस अभियान का कोई लाभ नहीं मिल सका हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए तालाब या तो बहुत छोटे हैं या फिर गहरे नहीं हैं। इसी तरह जिले में निर्मित सैंकड़ों स्टापडेमों के गेट नदी-नालों में पानी रहते समय बंद नहीं किए जाते।


किस काम के स्टापडेम

जनमानस की सुविधा के लिए शासन द्वारा पानी रोको अभियान के तहत तालाब और स्टापडेमों का निर्माण कराया गया था। जिला प्रशासन का ध्यान भी स्टापडेमों की ओर से पूरी तरह हट चुका हैं। अमरपुर ब्लाक में अनेकों ऐसे स्टाप डेम बनाए गए हैं जहाॅ पानी का भराव ही नहीं हैं। अधिकतर स्टापडेमों में शटर भी नहीं लगाए गए हैं। बरिश के मौसम के बाद नियमानुसार स्टापडेमों के गेटों को बंद किया जाना चाहिए लेकिन जिला प्रशासन और ग्राम पंचायतों की लापरवाही के कारण स्टाप डेम के गेट समय रहते बंद नहीं किए जाते जिससे नदी-नालों का पूरा पानी बह जाता हैैं।

नहीं रहता पानी, होगी परेशानी

जानवरों और आमजन की सुविधा के लिए निर्मित तालाब और स्टापडेम सफेद हांथी साबित  रहे हैं। गर्मियों के मौसम में ग्रमीण   किसी तरह अपना काम चला लेते हैं परंतु मवेशीयों को पानी के लिए अत्याधिक परेशानियों का सामना करने के साथ ही यहां-वहां भटकना पड़ता हैं। वर्तमान समय में जब पानी रोकने की अत्यंत आवश्यकता महसूस की जा रही हैं और इसके लिए राज्य सरकार एंव भारत सरकार अनेक तरह की तकनीक  ईजाद कर रहे हैं वहीं जिला प्रशासन इस ओर से पूरी तरह बेखबर हैं। आने वाले गर्मी के मौसम में जहाॅ जानवरों को पानी की समस्या से जुझना पडेगा वहीं ग्रामीणों को भी पानी के लिए भाग-दौंड करनी पड़ेगी। समय रहते स्टापडेमों के गेटों को बंद करना जनहित में अत्यंत आवश्यक होगा। गौरतलब हैं कि बीते वर्ष गर्मी के मौसम में अमरपुर ब्लाक में जलसंकट की जबरदस्त मार पड़ी थी। पूरा मामला लम्बे अरसे तक अखबारों की सुखियाॅ बना हुआ था।

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