गाँधी जयंती के रोज बड़वानी में गाँधी समाधि पर इकट्ठे हुए नर्मदा घाटी के सैकड़ों किसान, मजदूर, मछुआरे | Gandhi jayanti ke roz badwani main gandhi samadhi pr ikatthe hue narmada ghati

गाँधी जयंती के रोज बड़वानी में गाँधी समाधि पर इकट्ठे हुए नर्मदा घाटी के सैकड़ों किसान, मजदूर, मछुआरे

गाँधी जयंती के रोज बड़वानी में गाँधी समाधि पर इकट्ठे हुए नर्मदा घाटी के सैकड़ों किसान, मजदूर, मछुआरे

बड़वानी (शकील मंसूरी) - स्वयं विस्थापन भुगतते हुए भी, प्रस्थापितों से किये जा रहे 35 साल पुराने, आज भी जीवित संघर्ष में जिन्होंने सत्य और अहिंसा की ही साथ दी, उन्हें गाँधी जी से प्राप्त प्रेरणा आज के दिन दोहरायी जाती है, संकल्प के साथ|

गाँधी जयंती के रोज बड़वानी में गाँधी समाधि पर इकट्ठे हुए नर्मदा घाटी के सैकड़ों किसान, मजदूर, मछुआरे

दो वर्ष पहले, गाँधी, कस्तुरबा, महादेवभाई के रक्षा कलशों को बचाने के लिए लड़ना पड़ा था| मध्य प्रदेश शासन ने गाँधी की अवमानना की थी लेकिन समाधि का भी आखिर पुनर्वास करना पड़ा| आज भी जिन मजदूर किसानों को न्याय नहीं मिला है, वे भी एक होकर अहिंसक सत्याग्रही बने है, उपवास, मूक रैली के द्वारा अपना हक जता रहे है| सेंचुरी श्रमिक, जो 3 सालों से रोजगार को बचाने के लिए कटिबध्द होकर सत्याग्रह चला रहे है, वे भी शामिल हुए है| गाँधी जयंती के अवसर पर नये राजघाट पर सभी आन्दोलनकारियों ने नारा दिया : 
                 
गाँधी जयंती के रोज बड़वानी में गाँधी समाधि पर इकट्ठे हुए नर्मदा घाटी के सैकड़ों किसान, मजदूर, मछुआरे

सत्य अहिंसा और स्वराज,
                         जनतंत्र का हो यही आधार।

वैष्णव जन तो तेनेकहिए रे..... की प्रार्थना से सेंचुरी के श्रमिक नवीन मिश्रा जी व साथियों ने कार्यक्रम की शुरुआत की।

गांधी जी को वंदन के कार्यक्रम के बाद आज की परिस्थिति का जायजा लेते हुए, एकेक विषय पर गांधीवाद, सर्वोदय और देश में हो रही हिंसा, जाति, धर्म, लिंग भेद के आधार पर, का स्पष्ट विरोध किया गया।

राहुल यादव तथा वाहिद भाई मंसूरी के संचालन में सभा का प्रारंभ हुआ| 

वाहिद भाई मंसूरी ने कहा “गाँधी एक ग्रन्थ है| पूरी दुनिया आज उसी से सीख ली है|”

बडवानी के नगराध्यक्ष लक्ष्मण चौहान ने कहा कि आज देश भर में हर निर्णय किसानों के विरोध में हो रहा है| मुझे बडवानी की जनता को शुध्द पानी पिलाना भी नामुमकिन हो रहा है| सत्ता में बैठने वालों को न किसानों की, आदिवासियों की परवाह है, नहि प्रकृति की| नर्मदा बचाओ आन्दोलन की 35 सालों की लड़ाई को इसलिए मैं मानता हूँ|

चंदू भाई यादव, किसान नेता ने गाँधी जी के मार्ग पर चलने का आवाहन किया| किसान विरोधी कानूनों को सख्त विरोध घोषित किया| जनता के काम करने वालों को ही चुनने का आवाहन किया|

राजन मंडलोई, पेंशर्स एसोसिएशन, श्री जैन आदि ने बिजली बिल्स, मजदूरों का अधिकार छिनने वाली संहिता आदि पर किसानों का प्रबोधन एवं जागरण किया|  

भागीरथ भाई धनगर ने कहा कि देश में जाति, धर्म के नाम पर देश के भीतर चल रही गुंडागर्दी जनतंत्र के खिलाफ है इसलिए हमें गाँधी के मार्ग पर चलते ही रहना पड़ेगा|

सनोबर मंसूरी और कमला यादव ने महिला किसानों का दर्द व्यक्त करते हुए कहा कि महिला मानवीयता को जानती और मानती है| हम महिलाओं पर अत्याचार नहीं सहेंगे| गांधीजी के साथ आजादी आन्दोलन में स्त्रीशक्ति थी, वैसे ही हम भी नर्मदा के आन्दोलन के साथ है, और रहेंगे|

देवराम कनेरा ने कहा, नर्मदा घाटी ने देखी है विकास के नाम पर हो रही हिंसा। हम वैकल्पिक विकास चाहते है। नर्मदा घाटी की लड़त उसी के लिए है। गांधी जी ने उसका रास्ता बताया है।
डॉ. सुनीलम ने फोन पर वक्तव्य के द्वारा किसान-विरोधी कानूनों का धिक्कार किया| उन्होंने कम्पनीकरण के असर क्या होंगे, इस बात को बताकर ऐलान किया कि किसानी एकता से पहले झुकाया था, वैसे ही इन कानूनों पर भी केंद्र को झुकायेंगे| उन्होंने कहा कि आज सत्ताधीशों ने जबकि किसान और खेती विरोधी कार्पोरेटीकरण का रास्ता अपनाया है, उसी के लिए 3 कानून बदलने का कृष्णकृत्य किया है, तो किसानों को गांधी जैसे सत्याग्रही बनना होगा। चंपारण के सत्याग्रह को याद करना होगा। खेती क्षेत्र में कंपनियाँ खेती को खत्म करेगी, किसानों की आत्महत्याएँ और बढ़ेगी। हमें प्रकृति पर जीने वाले सभी समुदाय और मेहनतकशों की एकता के साथ समता के लिए लड़ना होगा।

कविता भागवत, शिक्षातज्ञ ने गांधी जी के शिक्षाविषयक विचारों पर प्रकाश डाला और बुनियादी तालिम की संकल्पना उजागर की। उन्होने कहा, आज की शिक्षानीति में उसका चेहरा नहीं दिखाई देता लेकिन हम कोशिश जारी रखे है, जीवनशालाओं के द्वारा, आदिवासी बच्चों की नई पीढ़ी तैयार करने में।

मेधा पाटकर जी ने गांधी जी की आज अधिक जरूरत क्यों है, यह बताते हुए कहा कि देश के सत्ताधीश उन्हे दीवार पर टंगे रखते है, फुलहार चढ़ाते है लेकिन उनके आदर्शों को आज कुचला जा रहा है। सत्य को असत्य साबित करने में लगे है सत्ताधीश, उनके साथ जुड़े पूंजीवादी मीडिया को साथ लेकर। देश की अर्थव्यवस्था का सच तो अब सामने आया है, प्रवासी मजदूरों के रूप में। उनके पाँवों से हमारा दिल दहलाया.... और हमारे साथी लॉकडाउन में भी कार्यरत रहे...श्रमिकों का सम्मान फर्ज मानकर।

नर्मदा घाटी के लोग मानते है कि आज देश में गांधी जी का संदेश, सादगी, स्वावलंबन का भूलने से ही हमारी अर्थव्यवस्था पूरी रूप से ध्वस्त हो चुकी है। हिंसा को बढ़ावा देने वाली सत्ता और विकृत मानसिकता पनप रही है। हमें चाहिए कि हम निडर बनकर, सत्यवादी रहकर, हिंसा का जवाब दे जरूर, लेकिन अहिंसा पर ही डटकर। हमें किसान, मजदूर विरोधी कानून भी हिंसक है यह समझना चाहिये। कई सामाजिक कार्यकर्ता आज जेल में है क्योंकि वे व्यवस्था अन्याय के खिलाफ लड़ रहे है। हम उन के साथ रहे, यह जरूरी है।

        गांधीवाद में संघर्ष के साथ रचना का संदेश है। शिक्षा क्षेत्र में बुनियादी तालिम, खेती में जैविक खेती और स्वास्थ्य में नशामुक्ति का मार्ग हमें हर गाँव में संकल्प लेकर अपनाना होगा। हमें जाति-धर्म भेद को तोड़ना होगा।

आखिर में संघर्ष और निर्माण आगे बढाने का संकल्प लेकर सभा समाप्त हुई| 

 *कैलाश यादव, जगदीश पटेल, बलाराम यादव, डिम्पल सेन, बच्चूराम कन्नोजिया, रामेश्वर भिलाला, सरस्वती बहन, पन्नालाल पाटीदार, केशर सोमरे, राजा मंडलोई, महेंद्र तोमर, पवन यादव, राहुल यादव*

*संपर्क : 9179617513, 9755544097*

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