बेटे तो हैं चार फिर भी बुढ़ापे में हुए अनाथ | Bete to hai char fir bhi budape main hue anath

बेटे तो हैं चार फिर भी बुढ़ापे में हुए अनाथ

बेटे तो हैं चार फिर भी बुढ़ापे में हुए अनाथ

डिंडौरी (पप्पू पड़वार) - जिन बेटों को मां बाप ने बड़े लाड़ प्यार से यह सोंच समझकर पाला हो कि वह आगे चलकर उनके बुढ़ापे का सहारा बनेगा। आजकल वही बेटे उन्हें बुढ़ापे में दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही हुआ है डिंडौरी जिला अंतर्गत जनपद मुख्यालय समनापुर के स्कूल टोला निवासी बुद्धू लाल भरिया(70) के साथ। बेटे होने के बाद भी ठोकरें खाने को मजबूर किए गए बुद्धू लाल  ने अब तक किसी से मदद की गुहार नहीं लगाई है।

बेटे तो हैं चार फिर भी बुढ़ापे में हुए अनाथ

बुद्धू लाल के चार बेटे हैं। इनमें राजू, रज्जन,रामकुमार, व श्यामकुमार शामिल है। बुद्धू ने इनका लालन पालन करते समय अन्य अभिभावकों की तरह यही सोचा था बुढ़ापे में उनके पास एक नहीं चार लाठियां होंगी जो उन्हें जीवन के अंतिम क्षण तक सहारा देंगी। समय का ऐसा चक्र की जिन बेटों को उन्होंने अपने बुढ़ापे की लाठी समझकर दिन रात कड़ी मेहनत करते हुए पालपोस कर बड़ा किया उन्हीं बेटों ने उन्हें बेघर कर दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर कर दिया। लड़कों ने अपने पिता को घर से बाहर कर दिया। कुछ वर्ष पूर्व जिस कच्चे घर में बुद्धू लाल अपनी पत्नी के साथ निवास करते थे कुछ दिनों बाद पत्नी की मृत्यु गयी और इसी बात का फायदा उठाते हुए छोटे बेटे ने कच्चे घर को तोड़कर पक्का  निर्माण कराने लगा तब बूढ़े बुद्धू लाल को लगा की में अब अपने छोटे बेटे के साथ पक्के घर में रहूंगा लेकिन जब घर बनकर तैयार हुआ तो बेटा घर में ताला जड़कर गौरेला काम करने चला गया। छोटे बेटे की हरकत से परेशान वृद्ध पिता कुछ नही कर सका। अब बीमार बुद्धूलाल पक्के घर के किनारे झोपड़ी में रहने को मजबूर है।

बूढ़े पिता चारों बेटों के पास बारी बारी मदद मांगने गए, लेकिन किसी बेटे को अपने बाप पर दया नही आई। फिलहाल वह ग्रामीणों के रहमों करम पर जीवन यापन कर रहे हैं। 

ग्रामीणों ने मीडिया कर्मियों को दी सूचना

समनापुर के ग्रामीणों ने बीमार बुद्धू के हालात के बारे में जब मीडिया कर्मियों को सूचित किया तो उन्होंने तुरंत इस बात की सूचना नायब तहसीलदार दिनेश वरकड़े को दी सूचना पाते ही अधिकारी दल बल के साथ मौके पर पहुंच राशन उपलब्ध कराया एवं बेटे को समझाईश देते हुए  कहा है कि वे पिता की देखरेख करे अगर कोई बच्चा उसका पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत प्रकरण चलाया जा सकता है।

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